liveandlovelifebylal
Tuesday, June 23, 2026
मेरा अंतर्मन / डॉ लाल थदानी
Thursday, June 4, 2026
Tribute Pahlaj Nihalani/ Dr Lal Thadani
ahlaj Nihalani was a veteran Bollywood film producer and former Central Board of Film Certification (CBFC) chairman known for producing major blockbusters in the 1980s and 1990s. His production company launched the debut careers of several major stars, including Govinda and Chunky Pandey.
- Aankhen (1993): An action-comedy directed by David Dhawan, which became the highest-grossing Indian film of 1993.
- Shola Aur Shabnam (1992): A defining romantic action film directed by David Dhawan that cemented Govinda's star status.
- Paap Ki Duniya (1988): A blockbuster crime-action movie starring Sunny Deol and Chunky Pandey.
- Haathkadi (1982): Pahlaj Nihalani's debut film as a producer, starring Sanjeev Kumar and Shatrughan Sinha.
- Dil Tera Diwana (1996): A romantic thriller starring Saif Ali Khan and Twinkle Khanna.
- Andaz (1994): An action film starring Anil Kapoor and Juhi Chawla.
- Julie 2 (2017): A thriller for which he served as the presenter and distributor.
- Rangeela Raja (2019): A comedy film that he wrote, produced, and directed, starring Govinda.
- Anaari Is Back (2023): One of his most recent productions.
Sunday, May 24, 2026
The LALL’s Harmonium for a Healthier Life*
Good morning 🌄 everyone ।।।
This is Day 1 of our 2026. Unstoppable Journey at the IIMLS Health and Wellness Centre 🎶🎵
*गाते रहो, मुस्कुराते रहो, स्वस्थ रहो, मस्त रहो* You are here because something within you decided to begin.
Music Therapy, Yoga, Meditation, Naturopathy, hobby classes, art & painting, English speaking, the best use of AI, building human values, interpersonal relationships, entrepreneurship, and communication — all are part of this beautiful musical journey.
Before the day runs away, find just 2 minutes. Take off your shoes.
Feel the ground beneath your feet — kitchen floor, garden, corridor… anywhere.
Notice the texture.
Notice the temperature.
Take three slow breaths.
That is your practice for today. 🌿
And tonight, open your workbook to the first page. Write one honest answer to the question on the cover.
You do not have to show it to anyone.
It is only for you — and for me, if ever you need counselling.
We are all here together for one month. 🌿
Live and Love Life
— a blog by Dr Lal Thadani
*The LALL’s Harmonium for a Healthier Life*❤️ A beautiful musical world of positivity, peace, harmony, meditation,and wellness.
A Harmonium World to Live a Good Life
एक ऐसी आदर्श और संतुलित दुनिया का निर्माण करें जहाँ भाईचारा, शांति, प्रेम और एकता हो। सद्भाव, सदाचार, वसुदेव कुटुम्बकम्, सर्वधर्म, मानव , पशु, वनस्पति का सम्मान हो, पुनरूद्धार हो ।
यहाँ ‘Harmonium’ (संगीत वाद्ययंत्र) एक रूपक (metaphor) है — जीवन में सामंजस्य, संतुलन और मधुरता का प्रतीक
Monday, February 16, 2026
सुर ताल संगीत की लय/ डॉ लाल थदानी
Sunday, February 15, 2026
Talent Hunt Iimls / Dr Lal Thadani
प्रीतम आन मिलो / डॉ लाल थदानी
*प्रीतम आन मिलो*
फरवरी की धूप में भीगी कोई साँस,
मन की देहरी पर उतर आया उजास।
चुप हवा ने छू लिया स्मृति का वन,
पलकों पर फैल गया लाल आकाश।
अनकहे शब्दों का धीमा कंपन,
भीतर जाग उठा अद्भुत अहसास
एक स्पर्श से खुलता बंद मौसम,
रगों में बहने लगता मधुमास।
झंकृत हँसी में झरता भव्य उजाला,
रातों को मिल जाता मधुर प्रकाश।
साथ चले तो राह भी सरगम गाए,
पत्थर में खिल उठे फूल हरित घास।
रिश्ते लिखे नहीं जाते कागज़ पर,
धड़कनों में बसती उनकी प्यास।
चुप्पी भी बोल उठे पास आकर,
साँसों में घुल जाए सुवास।
प्रेम नहीं मांगता शपथ या वादा,
बस चाहता मीठी यादों का वास।
एक नाम धड़कता भीतर गहरे,
जैसे मंदिर में दिए जलाता दास
ये जीवन प्रिये ढाई आखर का सार,
मिलन की चाह दे आत्मिक आभास।
प्रेम ही आरंभ है और प्रेम ही अंतिम,
बाक़ी सब जग का क्षणिक प्रवास।
*डॉ लाल थदानी*
#अल्फ़ाज़_दिलसे
14.02.2022
Tuesday, February 10, 2026
#अल्फ़ाज़_दिलसे / डॉ लाल थदानी
1. *कसक*
रिश्तों में कहीं न कहीं रह जाती है कसक,
जो ज़ुबाँ कह न सके, बन जाती है कसक।
मुस्कुराते हुए भी अक्सर आँखें बता देती हैं,
हँसी के पीछे छुपी हुई यादों की है कसक।
किसी की बेपरवाही, किसी से बेइंतहा प्यार,
दोनों ही सूरतों में दिल को सताती है कसक।
टूटकर भी जो संभले, वही समझ पाया,
गिरने के बाद भी भीतर रह जाती है कसक।
कभी अपनों की दूरी, कभी ख़ुद से शिकवा, कोई न कोई टीस मन को जगाती है कसक।
वक़्त मरह़म भी है और वक़्त ज़ख़्म भी,
भरते घावों के साथ रह जाती है कसक।
हमने शिद्दत से निभाया, वो निभा न पाए,
अधूरी चाहतों से जन्म लेती है कसक।
अल्फ़ाज़ थक जाते हैं जब दर्द कहने में,
तब ख़ामोश निगाहें कह जाती है कसक।
लाल इतना ही सीखा है ज़िंदगी से अब तक,
जीना सिखा देती है दिल में दबी हुई कसक।
डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे
14.11.2025
2. *नया साल*
नया साल आया है, लाए उजियार,
प्यार की राहें हों, दिल में गुलज़ार ।
छोड़ो कल की बातें8 कड़वी यादें,
नया साल लाया है खुशियाँ अपार।
हर सुबह नई होगी, हर रात नई होगी,
छोटी मोटी नाराज़गी भूलता जा यार ।
नई उम्मीदें, नए सपने तुम्हें ही सजाने है,
अवसाद, घुटन, तनाव का करो तिरस्कार ।
न दुखाओ दिल ना किसी से खिलवाड़,
दाव पेंच में ज़िंदगी तेरी ही होगी बेज़ार ।
साल बदलता रहेगा, यादें भुलाना दुश्वार,
शुक्राना करता था, रंज बैर से कर इंकार।
गहरे समुद्र में कितने भी तू चला पतवार,
तेरे भीतर अदृश्य शक्ति ही करेगी नैया पार।
डराएगी आँधी, डगमगाएगी हर एक धार,
खुद पर भरोसा खोलेगा, उन्नति के नए द्वार।
डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे
01.01.2026
3. *मेरा परिचय*
मेरा परिचय क्या है
मैं खुद से ही अपरिचित क्यों हूं
दर्पण में जो चेहरा दिखता है
भीतर के सच से छिपित क्यों हूँ ।
मैं खुद को छू सकता हूँ
मैं खुद को महसूस कर सकता हूँ
धड़कनों की भाषा जान सकता हूँ
फिर भी असहज विचलित क्यों हूँ ।
मुझमें इतना सामर्थ्य नहीं
फिर भी हर संकट से लड़ जाता हूँ
सांसों में शक्ति भरपूर है
सपना के प्रति विचलित क्यों हूं ।
डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे
23.01.2026
4. *आओ मुकम्मल करें ख़्वाब*
भूली बिसरी याद सुनो फ़रियाद,
मेरे जज़्बात हैं दिल से अल्फ़ाज़।
वो चाँदनी रात और तुम मेरे साथ,
आधा था चंद्रमा आधी रही बात।
आओ मुकम्मल करें ख़्वाब।
हुए क्या नाराज़ दर्द हुए बेहिसाब,
बीते लम्हें मेरी धरोहर, है सौगात।
सूखी आँखें , तड़पत दिन और रात,
अश्क़ बह निकले बनके जज़्बात
आओ मुकम्मल करें ख़्वाब।
सूनी पड़ी सारी महफ़िलें आज,
कब होगी पहली जैसी मुलाक़ात।
तुम मेरी दुनिया, तुम मेरी परवाज़,
मेरी क़ायनात, ग़ज़ल और आफ़ताब।
आओ मुकम्मल करें ख़्वाब।
तुम बिन कहाँ होश-ओ-हवास,
टूट रही साँसे, लरज़ते कदमात,
बस तुम्हीं से आबाद मेरे जज़्बात,
भीड़ में अकेले में तेरे ही ख़यालात।
आओ मुकम्मल करें ख़्वाब।
— ✍🏻 डॉ. लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे
05.02.2022
5. *कुटिल इरादे*
किस बात पे हम रूठे थे
क्यों हो न सकी वो बात।
मुड़कर जो देखता हूं
कोई नहीं बस ख़ामोश साथ।
मीठे ज़हर से जिनके जज़्बात
नज़दीक रहकर लगाये दा़ग।
मुस्कान भी चुभने लगी थीं
मासूमियत मगर लाज़वाब।
कागज़, कलम, दवात, अल्फ़ाज़
वेदना _संवेदना, खुशी_ग़म, जज़्बात।
खट्टी मीठी यादों की मेरी सौगात
अनूठा संग्रह, ये दिल का आग़ाज़।
हर पन्ने पे अपनों का हिसाब
मेरी सांसें करती जिन्हें याद
अब मेरी हमराज़ मेरे ख़्वाब
तजु़र्बों से भरी मेरी किताब
फिर भी मेरी हर दुआ में
निकला बस उनका ही राग।
मासूम चेहरे कुटिल इरादे
बडे़ खौफ़नाक और बेहिसाब़।
डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे
02.09.2024