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Monday, July 10, 2017

जनसंख्या विस्फ़ोट : डॉ दीपा डॉ लाल थदानी

2011 की भारतीय जनगणना के मुताबिक, देश की आबादी 1,210,193,422 है यानी अपना देश एक बिलियन के स्तर को पार कर गया है। भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा सर्वाधिक आबादी वाला देश है। अनेक अध्ययनों ने अनुमान जतलाया है कि 2025 तक भारत आबादी के मामले में चीन को पछाड़ देगा। बेशक, जनसंख्या संबंधी नीतियों, सरकार द्वारा चलाए जा रहे परिवार नियोजन और कल्याण कार्यक्रमों के कारण से जन्म-दर में कमी आई है, तो भी जनसंख्या में स्थिरता 2050 तक ही आ पाएगी। इस वर्ष विश्व जनसँख्या दिवस का विषय "परिवार नियोजन: लोगों का सशक्तिकरण एवं राष्ट्रों का विकास”है। जनसंख्या में तीव्र वृद्धि देश के लिए अभिशाप है परिणामस्वरूप हमारे यहॉं गरीबी, बेराजगारी व महॅंगार्इ ,पर्यावरण संतुलन आदि समस्याए दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं। इससे हमारे आर्थिक विकास की सभी योजनाऐं निष्फल सिद्ध हो रही है। साथ ही संयुक्त परिवार विघटन , सामाजिक प्रदूषण , चोरी, लूटमार , डकैती , बलात्कार, लिंग निर्धारण , कन्या भ्रूण हत्या , तेज़ाब प्रकरण , मानसिक अवसाद आदि आये दिन समाचार की सुर्खियों में है । अधिक आबादी के कारण भारत में आबादी बढ़ने के दो प्रमुख आम कारण हैंः 1, जन्म दर का मृत्यु दर से अधिक होना। हमने मृत्यु दर को तो सफलतापूर्वक कम दर दिया है पर यही बात जन्म दर के बारे में नहीं कही जा सकती। 2 विभिन्न जनसंख्या नीतियों और अन्य उपायों से प्रजनन दर कम तो हुई है पर फिर भी यह दूसरे देशों के मुकाबले बहुत अधिक है। 3. जल्दी शादी और सार्वभौमिक विवाह प्रणाली: वैसे तो कानूनी तौर पर लड़की की शादी की उम्र 18 साल है, लेकिन जल्दी शादी की अवधारणा यहां बहुत प्रचलित है और जल्दी शादी करने से गर्भधारण करने की अवधि भी बढ़ जाती है। इसके अलावा भारत में शादी को एक पवित्र कर्तव्य और सार्वभौमिक अभ्यास माना जाता है जहां लगभग सभी महिलाओं की शादी प्रजनन क्षमता की आयु में आते ही हो जाती है। 4.  गरीबी और निरक्षरता: आबादी के तेजी से बढ़ने का एक अन्य कारण गरीबी भी है। गरीब परिवारों में एक धारणा है कि परिवार में जितने ज्यादा सदस्य होंगे उतने ज्यादा लोग कमाने वाले होंगे। कुछ लोग यह मानते हैं कि बुढ़ापे में देखभाल करने के लिए भी बच्चों का होना जरुरी है। यह एक अजीब बात है लेकिन सच है कि भारत अब भी गर्भ निरोधकों और जन्म नियंत्रण विधियों के इस्तेमाल में पीछे है। कई लोग इस बारे में बात करने के लिए तैयार नहीं होते हैं या फिर इससे पूरी तरह अनजान हैं। निरक्षरता भी आबादी बढ़ने का एक अन्य कारण है। 5. पुराने सांस्कृतिक आदर्श: भारत में बेटे परिवार में पैसे कमाने वाले माने जाते हैं। इस दकियानूसी सोच के चलते माता-पिता पर बेटा पैदा करने का दबाव बहुत बढ़ जाता है। जितने ज्यादा हो उतना और अच्छा। 6 अवैध प्रवासी: सबसे आखिरी में हम इस तथ्यO को नहीं नकार सकते कि बांग्लादेश, नेपाल से अवैध प्रवासियों की लगातार वृद्धि से जनसंख्या घनत्व में बढ़ोत्तरी हुई है। अधिक आबादी के प्रभाव आजादी के 67 साल के बाद भी बढ़ती आबादी के कारण देश का परिदृश्य कुछ खास अच्छा नहीं है। ज्यादा आबादी के कुछ खास प्रभाव इस प्रकार हैं: 1. बेरोजगारी: भारत जैसे देश में इतनी ज्यादा आबादी के लिए रोजगार पैदा करना बहुत मुश्किल है। अनपढ़ लोगों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। इसलिए बेरोजगारी दर लगातार बढ़ती ही जा रही है। 2. जनशक्ति का उपयोग: भारत में बेरोजगारों की बढ़ती संख्या के चलते आर्थिक मंदी, व्यापार विकास और विस्तार गतिविधियां धीमी होती हैं। 3. बुनियादी ढांचे पर प्रभाव: दुर्भाग्य से बुनियादी ढांचे का विकास उतनी तेजी से नहीं हो रहा जितनी तेजी से आबादी में वृद्धि हो रही है। इसका नतीजा परिवहन, संचार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा आदि की कमी के तौर पर सामने आता है। झुग्गी बस्तियों, भीड़ भरे घरों, ट्रेफिक जाम आदि में बढ़ोत्तरी हुई है। 4. संसाधनों का उपयोगः भूमि क्षेत्र, जल संसाधन और जंगल सभी का बहुत शोषण हुआ है। संसाधनों में कमी भी आई है। 5. घटता उत्पादन और बढ़ती लागत: खाद्य उत्पादन और वितरण बढ़ती हुई आबादी की बराबरी करने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए उत्पादन की लागत में वृद्धि हुई है। महंगाई आबादी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। 6. अनुचित आय वितरण: बढ़ती हुई आबादी के अलावा आय के वितरण में बड़ी असमानता है और देश में असमानता बढ़ती जा रही है । सरकार द्वारा जन जागरुकता बढ़ाने और जनसंख्या नियंत्रण के कड़े मानदंड बनाने से देश की आबादी पर नियंत्रण पाया जा सकता है और इससे देश की आर्थिक समृिद्ध बढ़ेगी जनसंख्या की वृद्धि को रोकने के लिए अग्रलिखित उपाय किये जा सकते हैं- 1- शिक्षा का प्रसार- भारत की 80 प्रतिशत जनसंख्या आज भी गॉंवों में निवास करती है। गांवों में शिक्षा की कमी और अज्ञानता के कारण तथा नगरों में गंदी बस्तियों के लोगों में शिक्षा के व्यापक प्रचार प्रसार से ही जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण किया जा सकता है। 2- परिवार नियोजन- जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए परिवार नियोजन के विभिन्न कार्यक्रमों का जन आंदोलन के रूप में प्रचार-प्रसार अति आवश्यक है। 3- विवाह की आयु में वृद्धि करना- हमारे देश में आज भी बाल विवाह की प्रथा है। अत: बाल-विवाह पर कारगर कानूनी रोक लगायी जानी चाहिए। साथ ही लड़के-लडकियों की विवाह की उम्र 18 और 21 को भी बढ़ार्इ जानी चाहिए। 4- संतानोत्पत्ति की सीमा निर्धारण सभी धर्म और जातियों पर समान रूप और कढ़ाई से लागू हो । यह परिवार, समाज और राष्ट्र के हित में अति आवश्यक है। जनसंख्या विस्फोट से बचने के लिए प्रत्येक दम्पत्ति के संतानों की संख्या 1 या 2 हो चीन में इसी उपाय को अपनाकर जनसंख्या वृद्धि में नियंत्रण पा लिया गया है। मगर भारत में हिंदुओं को अब अपने अस्तित्व से डर लगने लगा है । 5- सामाजिक सुरक्षा- हमारे देश में वृद्धावस्था, बेकारी अथवा दुर्घटना से सुरक्षा न होने के कारण लोग बड़े परिवार की इच्छा रखते हैं। अतएव यहॉं सामाजिक सुरक्षा के कार्यक्रमों में बेराजगारी भत्ता, वृद्धावस्था, पेंशन, वृद्धा-आश्रम चलाकर लोगों में सुरक्षा की भावना जाग्रत की जाय। 6- सन्तति सुधार कार्यक्रम- जनसंख्या की वृद्धि को रोकने के लिए सन्तति सुधार कार्यक्रमों को भी अपनाया जाना चाहिए। संक्रामक रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों के विवाह और सन्तानोत्पत्ति पर प्रतिबंध लगाया जाये। 7- जीवन-स्तर को ऊॅंचा उठाने का प्रयास- देश में कृषि व औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाकर लोगों के जीवन स्तर को ऊॅंचा उठाने के प्रयास किये जाने चाहिए । जीवन स्तर के ऊॅंचा उठ जाने पर लोग स्वयं ही छोटे परिवार के महत्व को समझने लग जायेंगे। 8- स्वास्थ्य सेवा व मनोरजन के साधन- देश के नागरिकों की कार्यकुशलता एवं आर्थिक उत्पादन की क्षमता को बनाये रखने के लिए सार्वजनिक व घरेलू स्वास्थ्य सुविधा एवं सफार्इ पर ध्यान देना आवश्यक है। डाक्टर, नर्स एवं परिचारिकाओं आदि की संख्या में वृद्धि किया जाना चाहिए। ग्रामीणों को स्वास्थ्यप्रद जीवन व्यतीत करने तथा मनोरंजन के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाये कि गॉंवों में स्त्री पुरूषों के लिए एकमात्र मनोरंजन का साधन न रहे।  उपर्युक्त उपायों के अतिरिक्त अन्योन्य उपायों से जन्मदर में कमी करना विवाह की अनिवार्यता को ढीला बनाना, स्त्री शिक्षा, स्त्रियों के आर्थिक स्वावलम्बन पर जोर देना, गर्भपात एवं बन्ध्याकरण की विश्वसनीय सुविधाओं का विस्तार करना, अधिक सन्तान उत्पन्न करने वाले दम्पत्ति को सरकारी सुविधाओं से वंचित करना एक या दो बच्चे पैदा करने वाले दम्पत्ति को विभिन्न शासकीय लाभ दिया जाना चाहिए। Shared with https://goo.gl/9IgP7

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