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Tuesday, June 12, 2018

आप हैं तो देश सुरक्षित है - डॉ लाल थदानी

आप हैं तो देश सुरक्षित है - डॉ लाल थदानी

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संकल्प क्रांति परिवार की सम्मानीय सदस्य श्रीमती बबिता शर्मा एवं शहीद श्री सुभाष शर्मा जी के इकलौते बेटे क्षितिज ने सेना में लेफ्टिनेंट बनकर बढ़ाया.. कोटा राजस्थान का गौरव और देश का मान बढ़ाया है।

🏆शौर्य चक्र से सम्मानित बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट रहे शहीद
सुभाष शर्मा 16 अप्रैल 1996 को जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान आतंकियों को रोकते वक्त शहीद हो गए थे तब क्षितिज मात्र नौ महीने के थे.. उनकी मम्मी बबीता शर्मा ने
बेटे की अच्छी परवरिश कर देश सेवा करने लायक बनाया..  क्षितिज ने भी अपनी मां के सपनों को साकार करते हुए National Defence Academy में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया ।

# क्षितिज को हार्दिक शुभकामनाएं व बबीता जी को बधाई।
आप हैं तो देश सुरक्षित है ।
जय हिंद !! वन्दे मातरम ।

Friday, June 8, 2018

Live every Moment/ Dr Deepa Dr Lal Thadani

Eternal relations are
just like water.
No color, no taste,
no shape, no place
but still very important
for life.
Everyday Every moment
will not come back.
So No fights, No anger
Live Every Moment

Live and Love Life ...
Enjoy Life
Life is very beautiful.

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Live Healthy (Dr.Lal)

Sunday, June 3, 2018

विश्व पर्यावरण दिवस 2018 मात्र प्रतीकात्मक नहीं बल्कि एक मिशन : डॉ.दीपा /डॉ.लाल थदानी

https://plus.google.com/+DrLalThadani/posts/5r6N2GpQSSX?_utm_source=1-2-2

विश्व पर्यावरण दिवस 2018 मात्र प्रतीकात्मक नहीं बल्कि एक मिशन : डॉ.दीपा /डॉ.लाल थदानी


विश्व पर्यावरण दिवस 2018 
की थीम है प्लास्टिक प्रदूषण की  समाप्ति ।
इस वर्ष की वैश्विक मेजबानी भारत को मिली  है।इसलिए भी विश्व पर्यावरण दिवस 2018 मात्र एक प्रतीकात्मक समारोह  नहीं बल्कि एक मिशन है।पर्यावरण हमारे जीवन का एक महत्वपूर्णअंग है।हम अपने दैनिक जीवन में पर्यावरणीय संसाधनो का प्रयोग करते है। । कोयला और पेट्रोलियम जैसे गैर नवीकृत संसाधनो का प्रयोग करतेसमय विशेष ध्यान रखना चाहिए जो समाप्त हो सकते है। भूमिऔर पानी के प्रदूषण ने पौधो, जानवरो औरमानव जाति को प्रभावित किया है। अनुमान हैकि प्रत्येक वर्ष लगभग पाचं से सात मिलियनहेक्टयेर भूमि की हानि हो रही है। मानव कीसभी क्रियाओ का पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है । जनसंख्या में वृद्धि केवल प्राकृतिकपर्यावरण के लिए ही समस्या नही है । अपितु यह पर्यावरण के अन्य पक्षों जैसे सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक पक्षो के लिए भीसमस्या है।

शहरीकरण का परिणाम है- धूल, बीमारी और विनाश। बढ़ते शहरीकरण की स्थिति में सफाई, बीमारी, आवास, जल आपूर्ति और बिजली की समस्याएं निरतंर बढ़ती रहती है।


यातायात और संचार साधनो के विकास केसाथ औद्योगिकीकरण ने न केवल पर्यावरणको प्रदूषित किया है अपितु प्राकृतिकसंसाधनो में भी कमी पैदा कर दी है। दोनोप्रकार से भारी हानि हो रही है।

 पर्यावरण प्रदुषण / समस्याएं को बढ़ातीप्लास्टिक थैलियाँ 

मानव द्वारा निर्मित चीजों में प्लास्टिक थैलीएक ऐसी है जो माउंट एवरेस्ट से लेकर सागरकी तलहटी तक सब जगह मिल जाती है।पर्यटन स्थलों, समुद्री तटों, नदी-नाले-नालियों, खेत-खलिहानों, भूमि के अन्दर-बाहर सबजगहों पर आज प्लास्टिक कैरी बैग्स अटे पड़ेहुए हैं। लगभग 3 दशक पहले किये गये इसअविष्कार ने ऐसा प्रभाव जमा दिया है कीआज प्रत्येक उत्पाद प्लास्टिक बैग में मिलताहै और घर आतेआते ये थैलियां कचरे मेंतब्दील होकर पर्यावरण को हानि पहुंचा रहीहैं। प्लास्टिक थैलियों की वजह से --वायुप्रदुषण, ध्वनि प्रदुषण और
 जल प्रदुषण होरहा है ।

 वायु प्रदुषण धुएं के द्वारा होता। मीलोंकारखानों और वाहनों द्वारा छोड़े गये धुएं सेपालीथिन का कचरा जलाने से कार्बनडाईआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड एवंडाईआक्सींस जैसी विषैली गैस उत्सर्जितहोती हैं। वायु-प्रदुषण होता है। ।  हम प्रदूषितवायु में सांस लेते है उसके परिणामस्वरूप हीफेफड़ों की बीमारियां, सिरदर्द सांस, त्वचाऔर अन्य बीमारियां हो 
जाती हैं । कैडमियमऔर जस्ता जैसी विषैलीधातुओं का इस्तेमालजब प्लास्टिकथैलों के निर्माण में किया जाता है , तो हृदय का आकार बढ सक़ता है और मस्तिष्क के ऊतकों का क्षरण होकर नुकसान पहुंचता है। प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहनेसे लोगों के खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जातीहै।

 प्लास्टिक की बोतल-टिफिन से कैंसर:

हाल ही में रिसर्च से ये बात सामने आई है किप्लास्टिक के बोतल और कंटेनर के इस्तेमालसे कैंसर हो सकता है। प्लास्टिक के बर्तन मेंखाना गर्म करना और कार में रखे बोतल कापानी कैंसर की वजह हो सकते हैं। कार मेंरखी प्लास्टिक की बोतल जब धूप या ज्यादातापमान की वजह से गर्म होती है तोप्लास्टिक में मौजूद नुकसानदेह केमिकलडाइऑक्सिन का रिसाव शुरू हो जाता है। येडाईऑक्सिन पानी में घुलकर हमारे शरीर मेंपहुंचता है।

 गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाकप्लास्टिक:

 प्लास्टिक की वजह से महिलाओं में ब्रेस्ट
कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। सिर्फ पन्नी हीनहीं, बल्कि रिसाइकिल किए गए रंगीन यासफेद प्लास्टिक के जार, कप या इस तरह केकिसी भी उत्पाद में खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थका सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक सिध्द होसकता है।इनमें मौजूद बिसफिनोल ए नामक जहरीला पदार्थ बच्चों और गर्भवतीमहिलाओं के लिए खतरनाक है। बिसफिनोल ए शरीर में हार्मोन बनने की प्रक्रिया और उनकेस्तर को भी प्रभावित करता है।इससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
प्लास्टिक के घातक तत्वों के खाद्य पदार्थों एवंपेय पदार्थों के माध्यम से शरीर में पहुंचने सेमस्तिष्क का विकास बाधित होता है। इसकाबच्चों की स्मरण शक्ति पर सर्वाधिक विपरीतअसर पड़ता है।यह गर्भस्थ शिशु के विकास को भी रोकसकती है।

धुआं ओजोन परत को नुकसान पहुंचाता है जो ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा 
कारण है ।
प्लास्टिक थैलियों के बढ़ते प्रचलन से सफाईव्यवस्था में जबर्दस्त अवरोध पैदा हो रहा है।लोगों द्वारा घरों आदि का कूड़ा-करकटप्लास्टिक की थैलियों में बन्द कर फेंक दियाजाता है।
प्रायः हरी साग सब्जियों के छिलके एवं अन्य बेकार खाद्य पदार्थ भी पॉलीथीन की थैली मेंफेंक दिए जाते हैं। प्लास्टिक के लिफाफों से फैली  गंदगी से आज पीलिया, डायरिया,  हैजा, आंत्रशोथ जैसी बीमारियां फैल रही है।पॉलीथीन को पशु छिलकों आदि के  साथ खा जाते हैं जो पशुओं के पेट में जाकर कभी कभी आँतों में फँस जाता  है। इस तरह पशुओं की मौत का कारण बन जाता है । नतीजा, जीव  जंतुओं की कई जातियां दुर्लभ होती जा रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीथिनसीवर जाम का सबसे बड़ा कारण है।  प्लास्टिक के 20 माइक्रोन 
या इनसे पतली पॉलीथीन की थैलियाँ  नाले नालियों और सीवर लाइनों में पहुँचकर उन्हें अवरुद्ध कर देती हैं। यदि इसे दस बीस वर्षों तक भी  जमीन में  दबाए रखा जाए यह तब भी नहीं गलती है। कुछ पॉलीथिन बैग्स करीब 500 या 600  सालों में गलते हैं। इससे गंदे पानी का बहाव बाधित होता है जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। बिनाबाढ़ के मोहल्ले में भी बाढ़ की शंका पैदाकरता हैं । पानी का रुकना गंदगी का साम्राज्य फैलना हैं मलेरिया फैलने का कारण बनता हैं ।

अपशिष्ट पदार्थ और कूड़ाकचरा नदियों में फेंक दिया जाता है इससे जल  प्रदूषित होजाता है । हानिप्रद कीटाणु उत्पन्न  हो  जाते है।हम प्रदूषित जल पीते हैं और अनेक बिमारियां हो जाती हैं।

प्लास्टिक जब गलते हैं तो मिट्टी
 में कई तरह केहानिकारक रसायन छोड़ देते हैं जो बाद में नदी-नालों से होते हुए  समुद्री जीव जंतुओं केलिए जानलेवा साबित होते हैं।पॉलीथीन नष्ट न होने के कारण यह भूमि की उर्वरा शक्ति को खत्म कर रही है। कृषि भूमिपर जहाँ कहीं भी जाकर मिट्टी में दब जाता हैफसलों के लिए उपयोगी कीटाणुओं को मारदेती है । इनसे बड़ा नुकसान यह होता है वहाँ कोई पौधा नहीं उग पाता हैबांग्लादेश में वर्ष 2002 में पॉलीथिन बैग्स कोइसलिए प्रतिबंधित करना पड़ा था क्योंकि ये1988 और 1998 में वहां कई इलाकों में बाढ़आने की वजह तक बन गए थे। । मशीनों औरवाहनों, जैसे – मोटरकार, बस  व ट्रको  का शोर वातावरण में मिल  जाता  है। इसे ध्वनि प्रदूषण कहते है।यह भी  खतरनाक है। यह हमारे कानों और  दिमाग  पर प्रभाव  डालता है। मनुष्य बहरा या कम सुननेवाला हो सकता हैं।

प्लास्टिक थैली बनी जहर की पोटली!

एक अनुमान के मुताबिक हर साल धरती पर500 बिलियन से ज्यादा पॉलीथिन बैग्सइस्तेमाल में लाए जाते हैं।

 सारे विश्व में एक साल में दस खरब प्लास्टिकथैलियां काम में लेकर फेंक दी जाती हैं।अकेले जयपुर में प्रतिदिन 35 लाख लोगप्लास्टिक का कचरा बिखेरते है और 70 टनप्लास्टिक का कचरा सडकों, नालियों औरखुले वातावरण में फैलता हैं। केन्द्रीयपर्यावरण नियन्त्रण बोर्ड के एक अध्ययन केमुताबिक एक व्यक्ति एक साल में 6 से 7 किलो प्लास्टिक कचरा ( पॉलीथिन बैग्स ) फैकता है। पूरे राजस्थान में प्लास्टिक उत्पाद-निर्माण की 1300 इकाइयाँ है, तो इस हिसाबसे पूरे देश में कितनी होंगी, यह सहज अनुमानका विषय है। आज देश भर में 85 फीसदी सेअधिक उत्पाद प्लास्टिक पैकिंग में ही आ रहेहैं। इस समय विश्व में प्रतिवर्ष प्लास्टिक काउत्पादन 10 करोड़ टन के लगभग है औरइसमें प्रतिवर्ष उसे 4 प्रतिशत की वृध्दि हो रहीहै। भारत में भी प्लास्टिक का उत्पादन वउपयोग बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। औसतनप्रत्येक भारतीय के पास प्रतिवर्ष आधा किलोप्लास्टिक अपशिष्ट पदार्थ इकट्ठा हो जाता है।इसका अधिकांश भाग कूड़े के ढेर पर औरइधर-उधर बिखर कर पर्यावरण प्रदूषणफैलाता है।दुनिया भर में हर सेकंड आठ टनप्लास्टिक बनता है. हर साल कम से कम 60 लाख टन प्लास्टिक कूड़ा समुद्र में पहुंच रहाहै. वैज्ञानिकों का कहना है कि महासागर भीबुरी तरह इस कचरे से भर गए हैं. धोखे सेपॉलीथिन खाने के कारण हर साल दुनिया भरमें एक लाख से अधिक व्हेल मछली, सीलऔर कछुए सहित अन्य जलीय जंतु मारे जातेहैं. जबकि भारत में 20 गाय प्रतिदिनपॉलीथिन खाने से मर रही हैं. इतना ही नहींसैकड़ों सालों तक नष्ट न होने वाली पॉलीथिनसे नदी नाले ब्लॉक हो रहे हैं और जमीन कीउत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है. 

1995 में भारत में 7916 टन प्लास्टिक कचरेका आयात किया। प्लास्टिक कचरे केअतिरिक्त भारत ने 1993 में 502 टन लेडकचरा, 346 टन लैड बैटरी कचरा, 30,498 टन टिन, कॉपर और अन्य धातुओं का कचराआयात किया। 1993 के बाद से भारत मेंकचरे का आयात बढ़ रहा है।


 प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध


प्लास्टिक थैलियों के उद्योगों कोउत्पादकताओं को भले ही क्षणिक फायदाहोता हो कुछ फायदा हो रहा हो औरउपभोक्ताओं को भी सामान ले जाने में सुविधामिल रही हो लेकिन यह क्षणिक लाभपर्यावरण को दीर्घकालीन नुकसान पहुंचा रहाहै। कुछ लोग 20 माइक्रोन से पतले प्लास्टिकपर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर उसमेंअधिक मोटे प्लास्टिक को रिसाइक्लड करनेका समर्थन करते है लेकिन वह रिसाइक्लड  प्लास्टिक भी एलर्जी, त्वचा रोग एवं पैकिंगकिये गये खाद्य पधार्थों को दूषित करता है।

इसलिए हर तरह की प्लास्टिक बैग / प्लास्टिक थैलियों पर पूर्णतया प्रतिबंध लगायाजाना जनहित में जरुरी हैं।

 प्लास्टिक कचरा प्रबंधन हेतु कार्ययोजनायें

पर्यावरण और वन मंत्रालय ने रि-साइकिंल्डप्लास्टिक मैन्यूफैक्चर ऐंड यूसेज रूल्स, 1999 जारी किया था, जिसे 2003 में,पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1968 केतहत संशोधित किया गया है ताकि प्लास्टिककी थैलियों और डिब्बों का नियमन औरप्रबंधन उचित ढंग से किया जा सके। भारतीयमानक ब्यूरो (बीआईएस) ने धरती मेंघुलनशील प्लास्टिक के 10 मानकों के बारे मेंअधिसूचना जारी की है।

 

प्लास्टिक से परहेज का कारण:

•         अधिकतर प्लास्टिक तेलों से बनते हैं,जो स्वयं में गैर-नवीकरणीय स्रोत हैं।

•         प्लास्टिक अत्यधिक ज्वलनशील हैं।इसलिए आग भड़कने की सम्भावना ज्यादारहती है

•         प्लास्टिक में लिपटे पदार्थों के खाने सेपशुओं का दम रहा है और बीमारियों से मररहे हैं।

• प्लास्टिक के उपयोग से नदी- नाले में रुकावट उत्पन्न हो  रही है।

•जलीय जीव जंतु समाप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं।

 पॉलीथिन का विकल्प ही समाधान

पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए हमें कपड़ा, जूट,  कैनवास, नायलान और कागज के बैग का इस्तेमाल सबसे 
अच्छा विकल्प है।सरकार को पॉलीथिन के विकल्प पेश कर रहे उद्योगों को कुछ  वित्तीय प्रोत्साहन देना चाहिए । साथ इन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जनता में जागरूकता  अभियान चलाना चाहिए। यहां, ध्यान देने की बात है कि कागजकी थैलियों के निर्माण में पेड़ों की कटाईनिहित होती है और उनका उपयोग भी सीमितहै।  इसके लिए लोगों को भी अपनी आदत मेंबदलाव लाना चाहिए। जब भी घर से बाजारके लिए निकलें कपड़ा या जूट का बैग साथलेकर जाएं। आदर्श रूप से, केवल धरती मेंघुलनशील प्लास्टिक थैलियों का उपयोग हीकिया जाना चाहिये। जैविक दृष्टि सेघुलनशील प्लास्टिक के विकास के लियेअनुसंधान कार्य जारी है।

पॉलीथिन भगाओ पर्यावरण बचाओ एक मिशन
जिस तरह से पर्यावरण खराब हो रहा है अगर समय रहते उस पर  ध्यान नहीं दिया गया तोआने वाली पीढ़ी को इसका खामियाजाभुगतना पड़ेगा । पूरे देश को एकजुटहोकर इस मुहिम में जुटना होगा और हर एकव्यक्ति अगर अपने आस-पास के 10 लोगों मेंभी प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को लेकरजागरुक करे तो रोजमर्रा के इस्तेमाल में होनेवाले प्लास्टिक से बढ़ते खतरे से लोगों कोबचाया जा सकता हैं।

 हमें पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए।योजनाबद्ध औद्योगीकरण होना चाहिए। हमेंअधिक से अधिक पेड़ उगाने चाहिए।आज लोगों को लग रहा है कि गर्मी बहुत लगरही है। पर कब तक AC का सहारा लेंगे, आज हिन्दुस्तान में 150 करोड़ पेड़ कीजरूरत है।

अभी तो यह शुरुआत हैं। 45 से 50 डिग्री को55 से 60 होने में देर नहीं लगेगी। अभी सेसमझकर पौधे लगाने होंगे क्योंकि एक पौधेको बड़ा होने मे 5 से 7 साल लग जाएगे।

सब कुछ सरकार पर मत छोडिये।

वृक्षारोपण के फायदे

1. शुद्ध ऑक्सीजन मिलता है ।

2. हानिकारक गैसों, जो पर्यावरण को दूषितकरते हैं,को अवशोषित करता है । कार्बनमोनो-ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड औरअन्य हानिकारक गैसों और वाहनों द्वाराउत्सर्जित धुएं और उद्योगों से निकलते प्रदूषणको पेड़ों की उपस्थिति के कारण काफी हदतक नियंत्रित और शुद्ध किया जाता है।

3. इस प्रकार से वायु और जल प्रदूषणनियंत्रित करते हैं ।

4. पक्षियों और जानवरों के लिए भोजन औरआश्रय प्रदान करता है ।

5. गर्मियों के दिनों में छाया और आश्रय प्रदानकरता है।

6. पेड़ पर्यावरण को शांत रखते हैं। वे गर्मी केअसर को कम करने में मदद करते हैं।

उनसे प्राप्त ठंडक का असर ऐसा है कि यहआसपास के स्थानों में 50% तक एयरकंडीशनर की आवश्यकता को कम करसकता है ।

7. औषधि / प्राकृतिक उप प्रदान करते हैं ।

सेब, राख, देवदार, बीच, एलो वेरा, तुलसी,सफेद पाइन और सिल्वर बिर्च सहित कई पेड़और पौधें अपनी औषधीय गुणों के लिए जानेजाते हैं।

8. पेड़ तनाव कम करते हैं ।

तनाव जो कि विभिन्न शारीरिक और मानसिकबीमारियों का कारण है, पेड़ों में हमें फिर सेजीवंत करने की शक्ति है।

इलाके से एकत्र किये गये ऑर्गेनिक वेस्ट की प्रोसेसिंग शुरू होती है।लोगों की जरूरत के मुताबिक वेस्ट कोकम्पोस्ट और फ्यूल स्टिक में तैयार कियाजाता है। इन स्टिक का इस्तेमाल कोयले औरलकड़ी के विकल्प के रूप में किया जा सकताहै। इससे किसी भी तरह का पॉल्यूशन नहींहोता है।पहले लोग ग्रीन वेस्ट को फेंक देते थे,लेकिन अब वे इस ग्रीन वेस्ट से पेड़-पौधों केलिये फर्टीलाइजर तैयार कर सकते हैं।फूल, पत्तियाँ, सब्जी इत्यादि से फर्टिलाइजर, स्मोकफ्री फ्यूल, फ्यूल स्टिक जैसे प्रोडक्ट बनाते हैं।इससे किसी भी तरह का पॉल्युशन नहीं होता।साथ ही ग्रीन वेस्ट का सही उपयोग हो जाताहै।

डॉ दीपा थदानी प्रोफेसर,                जे एल एन मेडिकल कॉलेज अजमेर

डॉ लाल थदानी उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अजमेर ।

Thursday, May 31, 2018

DANGERS OF SMOKING /          Dr Deepa Dr Lal Thadani

DANGERS OF SMOKING /          Dr Deepa Dr Lal Thadani

(31st May ANTI SMOKING DAY)

There are more than 4,000 chemicals in cigarette smoke

  About 75% of deaths from chronic bronchitis and emphysema are attributed to smoking

Smoking is associated with cancers of the mouth, pharynx, larynx,

 Oesophagus, stomach, pancreas, cervix, kidney, ureter, and bladder.

The overall rates of death from cancer are twice as high among smokers as among nonsmokers

with heavy smokers having rates that are four times greater than those of nonsmokers.

On average, smoking removes 15 years from a smoker's expected life span

Cigarette smoke paralyzes the cilia it contacts in the sinuses and lungs for twenty-minutes

Include 43 known cancer-causing (carcinogenic) compounds n 400 other toxins.

Smoking accounts for more than 30% of all deaths from cancer, almost 90% of deaths from lung cancer,

Ammonia, sucrose, cocoa, and citric acid are added to cigarettes to help nicotine vapour be absorbed through your lungs more quickly to speed the nicotine 'hit'.

Cigarette Chemicals and Cigarette Poisons

Acetone is one of the chemicals in cigarettes. 

Acetone is used as solvent, for example in nail polish remover.

Benzene is used as an industrial solvent in fuel, dyes, synthetic rubbers,etc. 

Known to cause cancer in humans, benzene is particularly linked with leukaemia.

Cadmium is a very poisonous metal, commonly used to make batteries.

Repeated or long-term exposure to cadmium, even at relatively low concentrations, may result in kidney damage and an increased risk of cancer of the lung and of the prostate." US EPA

Formaldehyde is used to preserve dead bodies. 

Formaldehyde is a known carcinogen in cigarette smoke, and 

also causes respiratory and gastrointestinal problems.

Hydrogen cyanide is one of the most toxic deadly chemicals in cigarettes,

chemicals in tobacco, poisons in cigarettes, and poisions in tobacco. 

Short-term exposure to hydrogen cyanide can lead to 

headaches, dizziness, nausea and vomiting.

Lead is a highly toxic metal, capable of causing

serious damage to the brain, kidneys, nervous system and red blood cells.

"Children are particularly vulnerable because lead is more easily absorbed

into growing bodies and the tissues of small children are sensitive to its effects. Lead exposure in children can result in delays in physical development, 
lower IQ levels, shortened attention spans and increased behavioural problems" US EPA.

Mercury vapour is another of the poisonous deadly chemicals in cigarettes,

chemicals in tobacco, poisons in cigarettes, and poisions in tobacco.

Inhaling mercury vapour may lead to shakiness, memory loss and kidney disease.

Nickel causes increased susceptibility to lung infections.

(ANTI SMOKING DAY)

There are more than 4,000 chemicals in cigarette smoke

  

About 75% of deaths from chronic bronchitis and emphysema are attributed to smoking

Smoking is associated with cancers of the mouth, pharynx, larynx,

 Oesophagus, stomach, pancreas, cervix, kidney, ureter, and bladder.

, The overall rates of death from cancer are twice as high among smokers as among nonsmokers

with heavy smokers having rates that are four times greater than those of nonsmokers.

On average, smoking removes 15 years from a smoker's expected life span

.Cigarette smoke paralyzes the cilia it contacts in the sinuses and lungs for twenty-minutes

Include 43 known cancer-causing (carcinogenic) compounds n 400 other toxins.

Smoking accounts for more than 30% of all deaths from cancer, almost 90% of deaths from lung cancer,

Ammonia sucrose, cocoa, and citric acid are added to cigarettes to help nicotine vapour be absorbed through your lungs more quickly to speed the nicotine 'hit'.

Tuesday, May 22, 2018

घबराएं नहीं, जानें- क्या है निपाह वायरस, और कैसे करें बचाव । डॉ लाल थदानी MD Psm

घबराएं नहीं, जानें- क्या है निपाह वायरस, और कैसे करें बचाव ।  
डॉ लाल थदानी MD Psm
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Live Healthy (Dr.Lal)
8005529714
 21 May, 2018

1. निपाह वायरस क्या है?
                यह तेज़ी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है.1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह  में सुअर के संक्रमण कि वजह से किसानों में मस्तिष्क बुखार एंसेफ़्लाइटिस का प्रकोप हुआ जिससे निपाह वायरस का पता चला और नाम मिला । वर्ष 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए जो खजूर की खेती बाड़ी में काम करते थे । वायरस के वाहक पुराने चमगादड़ हैं, जिन्हें फ्रूट बैट भी कहा जाता है.

2. बीमारी के प्रारंभिक
लक्षण :

तेज़ बुख़ार और सिरदर्द
सांस लेने में समस्या 
मांसपेशी दर्द,
मतली और उल्टी
गर्दन में अकडन व बेहोशी के साथ बीमारी तेजी से बढ़ती है तथा दिमाग में सूजन के साथ
मरीज पांच से सात दिनों के भीतर कोमा में चला जाता ले है।

3. संक्रमित अवधि :
तीन से 14 दिन तक

4. यह वायरस कैसे फैलता है ?
_ सूअरों, उनकी देखभाल और सूअरों के मांस के व्यापार में काम करने वाले लोग।
_किसान जो चमगादड़ के संपर्क में आते हैं।
_ कच्चे फल का उपभोग जो पहले ही कुल्हाड़ी से काटा गया है।
_उन लोगों के संपर्क में आने कि वजह से जो पहले ही निपा वायरस के संक्रमण में है।

5. निदान :
एलिसा टेस्ट, राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान, पुणे ।

6. बचाव :

_ सूअरों और सुअर के देखभाल तथा मांस के व्यापार करने वालों के संपर्क से बचें।
_व्यक्तिगत और आसपास सफाई
_हाथ धोने पर विशेष ध्यान रखें।
_ सड़े गले, कच्चे फलों का उपभोग करने से बचें।
_अच्छी तरह से पके हुए व घर के बने भोजन का उपभोग करें।
_संकर्मित व्यक्तियों से बचने का प्रयास करे तथा वर्तमान स्थिति में समुंद्री तट से सटे शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर यात्रा या काम करते समय  एन 5 9 मास्क का उपयोग करें।
_ शुरुआती लक्षण में करें उपचार
उचित देखभाल है मुख्य आधार
नीम हकीम, झाड़ा पोंछा से बचें
तुरंत अस्पताल व डॉक्टर से संपर्क करे।

(इस महत्वपूर्ण संदेश को अपने सभी परिचित तथा मित्रो के साथ साझा करें, जिससे इस वायरस को फैलने से रोका जा सके।
_मिलकर हम किसी भी बीमारी से लड़ सकते हैं और जीत सकते है।)

डॉ लाल थदानी
एम डी (पी एस एम् )

Saturday, April 28, 2018

Live and Smile always / Dr Lal Thadani

Live and Smile always /Dr Deepa Dr Lal Thadani

Mother Teresa has rightly said 

Smile at your wife, 
Smile at your husband,
Smile at your children, 
Smile at each other --
Smile will help yu 2 grow
in greater love for each other. 
Live with Smile,
Love with Smile 
Life u get only once.

Live in Hearts of Millions             with service to mankind                  n   ailing Humanity. U dont               need a college degree to serve.Anybody can serve.     You only need a heart               Bcmo full of grace n love. 

"You give but little when you give                  of your possessions.
It is when you give of yourself that।           you truly give."

So Live n Love Life with                        selfless services. Love Life                        with smile always whatever be।                  the circumstances. (16.5.11)

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Wednesday, March 7, 2018

Girls are Precious/ Dr Deepa Dr Lal Thadani

International Women's Day
8th Mar 18/ Dr Lal Thadani

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Live Healthy (Dr.Lal)

“We Have Rich And Diverse Culture But The Partiality And Bias Towards Women Is Still A Shame On Our Society. According To A Report, Every Year, 5 Lac Baby Girls Are Killed In India Even Before They Step Into This World. “Save Girl Child” Initiative Has Been Taken By Many Social Organizations In Order To Change The Mindset Of Our Society And Think Positively Towards The Girl Child. Here We Present The Top 10 Inspirational Quotes, Slogans, Images Which You Can Share And Spread Awareness. Save Girls, Save The Girl Child, Is A Campaign In India To End The Gender-Selective Abortion Of Female Foetuses, Which Has Skewed The Population Towards A Significant Under-Representation Of Girls In Some Indian States. The "Beti Bachao" Campaign Is Supported By Human Rights Groups