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Monday, March 9, 2020

Happy , Healthy Disease free Holi

आपके जीवन में हर पल रहे खुशियों की बहार
निरोगी और स्वस्थ रहे आपका पूरा परिवार
विभिन्न रंगों के कैनवास में रंगा हो जीवन
मंगलकामना लेकर आया  होली का त्योहार
 डॉ लाल थदानी
अल्फ़ाज़_दिल से

Sunday, February 2, 2020

जीवनशैली में बदलाव से बढ़ रहे कैंसर के मरीज / डॉ लाल थदानी


https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=3056059267737820&id=545811152095990



विश्व कैन्सर दिवस 4 फरवरी

जीवनशैली में बदलाव से बढ़ रहे कैंसर के मरीज / डॉ लाल थदानी
MD Psm
Public Health
Professional Officer

पिछले कुछ वर्षों से भारत में कैंसर मरीजों की संख्या में 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है. इसका प्रमुख कारण खराब जीवन शैली जैसे कि एल्कोहॉल, शराब, सिगरेट, पान मसाला या तंबाकू आदि का प्रयोग करना है.एक रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है कि भारत में जो कैंसर सबसे ज्यादा पाए जाते हैं उनमें मुंह, फेफड़े ,होठ, पेट, आंत, बड़ी आंत का कैंसर , ईसोफेगस  , प्रोस्टेट, पित्ताशय  का  कैंसर, और महिलाओं में स्तन, डिम्ब ग्रंथी, गर्भाशय और गले का कैंसर प्रमुख है.
इसके प्रति जागरूकता लाने के लिए बहुत सी सरकारी और गैर – सरकारी संस्थाओं द्वारा विभिन्न कैंप, रैली, लेक्चर और सेमिनार, आदि चलाये जाते हैं. 

वर्ल्ड कैंसर डे मनाने का प्राथमिक उद्देश्य
सन 2020 तक कैंसर पीड़ित व्यक्तियों की संख्या में कमी करना और इसके कारण होने वाली मृत्यु दर में कमी लाना हैं.

एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि साल 2020 तक भारत में 12 लाख लोगों की मौत कैंसर की बीमारी के कारण होगी. वहीं, 10 लाख नए कैंसर मरीज भी सामने आएंगे । भारत में पिछले साल 10 लाख नए कैंसर मरीज सामने आए, तो 6 लाख लोगों की मौत इस जानलेवा बीमारी से हुई ।यह 2008 के आंकड़ों के मुकाबले 7.5 फीसदी अधिक है.

भारत में कैंसर मरीजों की मौत का कारण उनका देर से पता चलना भी है, जबकि अमेरिका में कैंसर पीड़ित ज्यादातर मरीज 70 साल से ज्यादा की जिंदगी गुजारते हैं. वहीं, भारत में कैंसर से मरने वालों में 71 फीसदी लोगों की उम्र 30 से 69 साल के बीच है ।

कैंसर होने के कारण  -:

तंबाकू सेवन करना,
ज्यादा वजन होना ( मोटापा )
सब्जियों और फलों का सेवन कम करना
शराब का अत्यधिक सेवन करना
शारीरिक क्षमता वाले काम न करना
अथवा कम करना
शहरों में प्रदुषण होने के कारण
आनुवंशिक संक्रमण,
सूर्य की अल्ट्रा वोइलेट किरणों
[UV rays] के कारण
वर्ष 2018 तक संपूर्ण विश्व से कैंसर को ख़त्म करने के लिए ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आह्वान पर वर्ल्ड कैंसर डे 2016 – 2018↵ के तहत
“वी कैन, आई कैन” नामक थीम के साथ सरकार ने जनजागृति अभियान चलाया  है ।
कुछ प्रमुख आकंड़े

भारत में बच्चेदानी के मुख के कैंसर की वजह से हर आठ मिनट में एक महिला की मृत्यु होती है। [1]
भारत में स्तन कैंसर से पीडि़त हर दो महिलाओं में से एक महिला की मृत्यु हो जाती है।
तंबाकू से संबंधित रोगों के कारण प्रतिदिन तकरीबन 2,500 व्यक्तियों की मौत हो जाती है।
पुरुषों में पाचं में से एक मृत्यु और महिलाओं में 20 में से एक मृत्यु धूम्रपान के कारण होती है।

भारत में कैंसर के आंकड़े
कैंसर से पीडि़त लोगों की अनुमानित संख्या: 25 लाख (लगभग)
प्रतिवर्ष कैंसर के नये मरीज: 7 लाख से अधिक
कैंसर संबंधित मृत्यु संख्या: 5,56,400
30 – 69 आयु के बीच होने वाली मौतें 
कुल: 3,95,400
(सभी कैंसर से संबंधित मौतों का 71%)
पुरूष: 2,00,100
महिलायें: 1,95,300
भारत में मुख एवं फेंफड़ों के कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु सभी कैंसर संबंधित मौंतो का लगभग 50% है। पुरुषों और महिलाओं में होने वाले पांच प्रमुख कैंसर सभी कैंसरों का 47.2% है।

बचाव ही उपचार है
जन जागरूकता और सहभागिता
मरीजों को प्रेरित करना
स्वस्थ जीवनचर्या बनाना
मदद के लिए प्रयास करना
स्वस्थ वातावरण और पर्यावरण
का निर्माण करना  ।
कैंसर की तुरंत जांच और रोकथाम करना
लोगों में ये समझ पैदा करना कि कैंसर का पता शुरूआती चरणों में चल जाने से इसका इलाज संभव हैं ।

कैंसर में मेटाबोलिक उपचार कीमो थेरेपी और रेडियो थेरेपी से बेहतर है

मेटाबोलिक उपचार (Metabolic Cancer Treatment) पूर्णतः हानि रहित है, इसके कोई भी दुष्परिणाम नहीं हैं जबकि कीमोथेरेपी एक बहुत ही हानिकारक उपचार से इसके दुष्परिणाम से दूसरे तरह के कैंसर भी हो सकते हैं ।
कैंसर को मारने के अलावा सामान्य कोशिकाओं पर होने वाले प्रभाव: मेटाबोलिक उपचार से कैंसर कोशिकाओं की मृत्यु होती है ।
इससे सामान्य कोशिकाएं प्रभावित नहीं
होती हैं । जबकि कीमोथेरेपी से सामान्य कोशिकाएं भी मरती हैं जिसकी वजह से कभी-कभी मरीज की ही मृत्यु हो जाती है ।
सफलता दर: कीमोथेरेपी लेने से कैंसर के मरीज के 5 वर्ष जिन्दा रहने की संभावना सिर्फ 2% है , मसलन 100 में से सिर्फ 2 व्यक्ति ही 5 वर्ष से ज्यादा जी पाता है. जबकि मेटाबोलिक उपचार की सफलता दर 60% से ज्यादा है ।

रोज करें इन चीजों का सेवन
विशेषज्ञ कहते हैं कि आप अपनी डाइट में कुछ सुधार और बदलाव करके कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं ।
1. ब्रोकली-  ब्रोकली खाने से कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है. इसे माउथ कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, लीवर कैंसर होने का खतरा काफी कम हो जाता है. सप्ताह में दो से तीन बार ब्रोकली खाना फायदेमंद होता है. यूं तो ब्रोकली को सब्जी के रूप में या फिर सूप के रूप में लिया जा सकता है लेकिन ब्रोकली को उबालकर हल्के नमक के साथ लेना सबसे अधि‍क फायदेमंद है।
2. ग्रीन टी-  ग्रीन टी पीने से कैंसर का खतरा कम होता है. ये ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर से सुरक्षित रखने में मददगार है. नियमित रूप से 2-3 कप ग्रीन टी पीना फायदेमंद है।
3. टमाटर-  टमाटर में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करते हैं. टमाटर, विटामिन A, C और E का भी बेहतरीन स्त्रोत है. इसके साथ ही ये ब्रेस्ट कैंसर से भी बचाव का अच्छा उपाय है. टमाटर का जूस पीने या फिर इसे सलाद के रूप में लेना  फायदेमंद होता है.                                4. ब्लू बैरी-  ब्लू बैरी कैंसर से बचाव का अचूक उपाय है । ब्लू बैरी स्किन, ब्रेस्ट और लीवर कैंसर से सुरक्षित रखने में मददगार है । ब्लू बेरी का रस पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है । 5. अदरक -
अदरक भी कई तरह के कैंसर से बचाव में सहायक है. अदरक शरीर में मौजूद टॉक्स‍िन्स को दूर करने का काम करता है. इसके सेवन से स्किन, ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका बहुत कम हो जाती है.
6. लहसुन- लहसुन में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर से सुरक्षित रखते हैं. रोजाना एक या दो कली कच्चा लहसुन खाने से कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है ।
कैंसर से बचाव इनके पूर्व निदान व पूर्व अवस्था पर संभव है। जिससे इन कैंसरों से होने वाली मृत्युदर को भी कम किया जा सकता है।

डॉ लाल थदानी
मेडिको सोशल रिफॉमर
हैल्थ एक्टिविस्ट
8005529714
drlal2010@gmail.com7

Saturday, November 30, 2019

विश्व एड्स दिवस 2019 पर विशेष

विश्व एड्स दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष :

क्या आप जानते हैं (आगामी प्रकाशनादीन धृतराष्ट्र पुस्तक से उद्धृत )

(ना नियमों का पालन हुआ न कर्तव्यों का पालन हुआ । क्यों, किसके लिए, कैसे
धृतराष्ट्र बने ...

1). राजस्थान प्रदेश में एचआईवी एड्स का नोडल ऑफिसर प्रत्येक जिले में उप मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी स्वास्थ्य को बनाया गया है । अजमेर से डॉ लाल थदानी को छोड़कर । ये अपवाद क्यों (जानिए अगले कुछ अंकों में  )
1. अजमेर में एचआईवी एड्स की आवाज सबसे पहले जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर में एक बहुत बड़े सेमिनार के रूप में 1984 में मेरे द्वारा उठाई गई थी । उसके 6 महीने बाद पुष्कर से एक विदेशी नागरिक एचआईवी पॉजिटिव पहला मरीज घोषित हुआ । डॉ सिसोदिया ने छात्र सदस्य के रूप में इसमें भाग लिया था ।

2). दैनिक नवज्योति ने अंतिम पृष्ठ पर चार फोटो और आधा पेज कवर किया था । सम्मानीय श्री दीनबंधु चौधरी जी के सिटीजन कौंसिल में मै और दिवंगत मंत्री श्री किशन मोटवानी जी सम्मानित सदस्यों में से एक थे।

3). विश्व एड्स की इंटरनेशनल संस्था द्वारा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 91 चेन्नई और दिल्ली  राष्ट्रीय सम्मेलन 92 में भाग लेने के लिए मुझे स्कॉलरशिप दी गई थी । चेन्नई में डॉ वीके माथुर ने सम्मेलन फीस देकर मेरे साथ भाग लिया था ।

4). DPC 2007 से कैडर पोस्ट प्रमोशन पश्चात 1 जनवरी 2008 से मैंने उप मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी स्वास्थ्य पदभार संभाला और by डिफॉल्ट जो नौकरी से पूर्व चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा में अपने स्तर पर राष्ट्रीय कार्यक्रम करता था अब सरकारी पद पर रहते हुए काम करने का अवसर मिला ।

5). मलेरिया , लेप्रोसी, कुष्ठ रोग एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम का बजट सीएमएचओ और कार्यालय सहायक ओम जीनगर देखते थे और उप मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी नवपद सृजन के बाद स्वास्थ्य विभाग में सर्वे सर्वा श्री ओम जीनगर प्रभावहीन हो गए थे । पहले बजट पर निगाह और हथेली उनकी थी ।

6). डिस्ट्रिक्ट यूनिट का गठन जून 2008 से हुआ । एचआईवी पीड़ितों के लिए समाज , कल्याण विभाग , जिला रसद अधिकारी , रेलवे और रोड़वेज से लड़कर हमने उनके लिए सरकार से अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई ।

7).इस दौरान सामान्य लड़की से एचआईवी पॉजिटिव की हो रही शादी  फिल्मी ड्रामे के तहत को रुकवाने में मेरी जिला प्रशासन , नवज्योति से बोल्ड महिला पत्रकार ने मेरा साथ दिया।

8). जिला प्रशासन ने 26 जनवरी 2009 को मेरे से आवेदन मांगा जिसे मेरे जिला अधिकारी ने हंसकर टाल दिया ।

9) डॉ वीके माथुर के निर्देशक बनने पर मैंने उन्हें पत्र लिखकर अवगत कराया कि अर्बन मलेरिया स्कीम अजमेर में जेडी अजमेर के अधीनस्थ है शेष जिलों में सीएमएचओ उसकी मॉनिटरिंग करता है । समस्त जिलों में एचआईवी एड्स का नोडल अफसर डिप्टी सीएमएचओ होता है अजमेर को छोड़कर ।

10).भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का नोडल ऑफिसर अतिरिक्त/उप मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी परिवार कल्याण है तो मुझे वरिष्ठता को देखते हुए यह पद दे दिया जाए क्योंकि डॉ के के सोनी के पास ट्रिब्यूनल कोर्ट से मेरे स्टे और सीनियरिटी केस के बावजूद दो वरिष्ठ पद होने से इसकी मॉनिटरिंग और सुदृढ़  क्रियान्विति संभव नहीं। केस डॉक्टर के के सोने के विरुद्ध अभी भी चल रहा है और और ने सीएमएचओ रेगुलर भी कर दिया गया जबकि उच्च न्यायालय में भी स्टे है यह कहते हुए कि डॉ लाल थदानी की वरिष्ठता और विशेषज्ञता का बार-बार उल्लंघन हो रहा है । मेडिकल कैडर का मजाक जितना राजस्थान में हुआ है उतना किसी अन्य प्रदेश में नहीं हुआ ।

11).तत्कालीन जिला कलेक्टर श्री गौरव गोयल ने भी सरकार को पत्र लिखा कि डॉक्टर के के सोनी से वरिष्ठ है और वह डॉक्टर थदानी को कॉर्पोरेट (सहयोग) नहीं कर रहे इसलिए परिवार कल्याण विभाग की जिम्मेदारी डॉ थदानी को दे दी जाए ।

इस पत्र के अलावा , वरिष्ठ आईएएस श्री नीरज के पवन की नोट शीट कि मेरे अधीन जेडी आईईसी के रिक्त पद पर  जयपुर निदेशालय में डॉ लाल थदानी को लगाया जाए (2016) लेकिन 1 अधिकारी ने कभी नहीं चाहा कि मै सुकून से रहूं । न जयपुर न अजमेर ।


क्रमशः

Wednesday, November 20, 2019

राजा वीर विक्रमादित्य

कौन थे राजा वीर विक्रमादित्य..... ????
जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था
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उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य...
बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी , जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली ,
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आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में है
अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था
भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे
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रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया
विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया
विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है
अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे
हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे,
उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है
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महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया
उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है
विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे
भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमदित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
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हिन्दू कैलंडर भी विक्रमदित्य का स्थापित किया हुआ है
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथीयाँ , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्ही की रचना है , वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे ,
विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय , राज सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था
विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी
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पर बड़े दुःख की बात है की भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में कांग्रेसी और वामपंथीयों का इतिहास भारत की जनता को शून्य ज्ञान देता है, कृपया आप शेयर करे
ताकि देश जान सके कि सोने की चिड़िया वाला देश का राजा कौन था ।

छींकना मगर एहतियात के साथ

*छींक रोकना बेहद खतरनाक हो सकता है,
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छींकना आमतौर पर अशुभ माना जाता है लेकिन कुछ छींक शुभ भी होती है*
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*✍🏽⭕तिलक माथुर*
*केकड़ी_राजस्थान* (19.11.2019)
छींक आना एक प्राकृतिक क्रिया है और स्वस्थ जीवन के लिए बहुत जरूरी है। दरअसल, जब कोई बाहरी तत्व हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा होता है तो उसे बाहर निकालने के लिए भी शरीर ये प्रतिक्रिया देता है।हमें छींक आ जाती है और वो संक्रामक चीज बाहर ही रह जाती है । सही मायनों में कहा जाए तो ये हमारे शरीर की सुरक्षा प्रक्रिया है। जब हम छींक रोकते हैं तो वो प्रेशर हमारे नाक या गले की कोशिकाओं पर दबाव डालकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार इसका असर दिमाग पर भी हो जाता है। कई बार ऐसा होता है कि सार्वजनिक रूप से छींकना हमें सही नहीं लगता है और हमारे छींकने से आस-पास के लोग भी असहज हो जाते हैं। यही वजह है कि हम 'एक्सक्यूज मी' कहकर छींकते हैं, पर क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि  सामने वाला आपको 'गॉड ब्लेस यू' क्यों कहता है.
दरअसल, छींक जिंदगी और मौत से जुड़ी  है। जी हां, ये बिल्कुल सच है कि छींक रोकना बेहद खतरनाक हो सकता है। हो सकता है कि आपके शरीर के दूसरे अंगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। दरअसल, छींक बहुत तेज गति के साथ आती है। ऐसे में जब हम छींक रोकते हैं तो वो प्रेशर हमारे नाक या गले की कोशिकाओं पर दबाव डालकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार इसका असर दिमाग पर भी हो जाता है।

छींक रोकने से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। छींक आने के दौरान हमारे नासा-छिद्रों से तेज रफ्तार में हवा बाहर आती है। अगर आप छींक रोकते हैं तो ये सारा दबाब दूसरे अंगों की ओर मुड़ जाता है। इससे सबसे अधिक नुकसान कान को हो सकता है। हो सकता है कि ऐसा करने से आपके ईयर-ड्रम्स फट जाएं और आपके सुनने की क्षमता चली जाए।
छींकने के साथ हमारे शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं, पर अगर आप छींक रोकते हैं तो ये शरीर में ही बने रहते हैं।
कई बार ऐसा होता है कि छींक रोकने की वजह से आंखों की रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो जाती हैं।
इसके अलावा गर्दन में भी मोच आ सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में दिल का दौरा आने की भी आशंका रहती ही है। अगर प्रभाव ज्यादा हो तो दिमाग की नसों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। सार्वजनिक स्थलों और लोगों के समूह के बीच में छींकना थोड़ा असहज लगता है और हम हाथ रखकर अपनी छींक रोक देते हैं। ये देखने में बहुत ही शालीन लगता है क्योंकि सामने वालों को किसी असहजता का सामना नहीं करना पड़ता है, पर स्वास्थ्य के लिहाज से ये बेहद खतरनाक हो सकता है। आप चाहें तो छींकने के दौरान मुंह पर एक रुमाल रख सकते हैं, जिससे सामने वाले को असहज भी नहीं महसूस होगा और संक्रमण फैलने का खतरा भी कम हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि आपने अक्सर ये देखा होगा कि छींक आने के कारण आप हल्का महसूस करते हैं लेकिन यदि छींक अटक जाए और आपकी लाख कोशिशों के बाद भी न आये तो आप असहज महसूस करने लगते हैं। छींक के फायदे अनेक हैं। यह श्वास नली को साफ़ करती है और नाक में मौजूद गंदगी को साफ़ करनें में मदद करती है। जब कोई चीज हमारी नाक में जाती है, तो नाक की दीवारें इसकी सूचना दिमाग तक पहुंचाती हैं। इसके बाद दिमाग हमारी आँखें, गले और मुंह को बंद करने का आदेश देता है। इसके बाद छाती की मान्पेसियाँ फूलती हैं और गले की मान्पेसियाँ आराम करती हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान गले में बनी हवा हमारी नाक और मुंह के जरिये तेजी से बाहर निकलती है, जिसे छींक कहते हैं।
ऐसा भी कहा जाता है कि छींक आने से दिमाग को भी फायदा होता है। दरअसल जब हम छींकते हैं, तो थोड़ी देर के लिए हमारी नाक और गला काफी आरामदायक महसूस करते हैं। इसी दौरान दिमाग में एक हार्मोन बनता है, जो दिमाग को अच्छा महसूस कराता है। इसी कारण से कई लोग जबरदस्ती नाक में कुछ डालकर छींक लाने का प्रयास करते हैं। इस असहजता से छुटकारा दिलाने के लिए आइये आपको बताते हैं कुछ ऐसे उपाय, जिनसे आपको आसानी से छींक आ सकती है। छींक लाने के लिए चॉकलेट का सेवन करना चाहिए।  कोई भी डार्क चॉकलेट या अत्यधिक कोको युक्त चॉकलेट खाएं और आपकी अटकी हुई छींक तुरंत बाहर आ जाएगी।  वहीं छींक लाने के लिए चुइंग गम खाएं। ऐसी गम्स जिनमें मिंट नहीं होता है । तेज़ मिंट को खा लेने से ही छींक आपके शरीर में उत्पादित होती है। क्यों फायदेमंद है ? मिंट के स्वाद के साथ साँस लेने से प्रेरित छींक त्रिधारा तंत्रिका के करीब किसी भी तंत्रिका के अतिउत्तेजित होने का परिणाम होता है और त्रिधारा तंत्रिका के ट्रिगर होने से ही छींक आती है। इसी प्रकार नाक का बाल खींचने से भी छींक आ जाती है। नाक का बाल तोड़ने के बारे में सोचने से ही हमें नाक में खुजली होने लगती है।
*आक्छीं*.... जी हां छींकना आमतौर पर अशुभ माना जाता है लेकिन कुछ छींक शुभ भी होती है। आइए जानें कैसे... सामने की छींक लड़ाई-झगड़े को बतलाती है। पीछे की छींक से सुख मिलता है अगर वह हमारे उल्टे हाथ की तरफ से आती है। ऊंची छींक बड़ी ही उत्तम होती है।नीची छींक बड़ी दुखदायिनी होती है और चलते समय अपनी खुद की छींक भी बड़ा दुख देने वाली होती है। दाईं तरफ की छींक धन को नष्ट करती है। बाईं तरफ की छींक से सुख मिलता है। यानी अगली बार छींक आए तो डरें नहीं यह शुभ भी हो सकती है।
*संकलन : तिलक माथुर 9251022331*

Tuesday, October 8, 2019

इस कर्णप्रिय गीत में श्री कृष्ण भगवान के 108 नाम के अलावा और कुछ नहीं है ।


1) ऊँ श्री अनन्ताय नम:

2) ऊँ श्री आत्मवते नम:

3) ऊँ श्री अद्भुताय नम:

4) ऊँ श्री अव्यक्ताय नम:

5) ऊँ श्री अनिरुद्ध पितामहाय नम:

6) ऊँ श्री आत्मज्ञान निधये नम:

7) ऊँ श्री आद्यपते नम:

8) ऊँ श्री कालिन्दी पतये नम:

9) ऊँ श्री कंसारये नम:

10) ऊँ श्री कुब्जावकृत्य निमेवित्रे नम:

11) ऊँ श्री कालिय मर्दनाय नम:

12) ऊँ श्री कृष्णाय नम:

13) ऊँ श्री क्रियामूर्तये नम:

14) ऊँ श्री कालरूपाय नम:

15) ऊँ श्री किरीटिने नम:

16) ऊँ श्री गोपालाय नम:

17) ऊँ श्री गोप गोपी मुद्रावहाय नम:

18) ऊँ श्री गोपी गीत गुणोदयाय नम:

19) ऊँ श्री श्यामाय नम:

20) ऊँ श्री गोपी सौभाग्य सम्भवाय नम:

21) ऊँ श्री चतुर्भुजाय नम:

22) ऊँ श्री गीतानमित पादपाय नम:

23) ऊँ श्री गोपस्त्री वस्त्रदाय नम:

24) ऊँ श्री गोवर्धन धराय नम:

25) ऊँ श्री ज्ञानयज्ञ प्रियाये नम:

26) ऊँ श्री चाणूर हत्रें नम:

27) ऊँ श्री गुरुपुत्रे प्रदाय नम:

28) ऊँ श्री जरासन्ध मदापहाय नम:

29) ऊँ श्री गरूड़ वाहनाय नम:

30) ऊँ श्री कर्ण विभेदनाय नम:

31) ऊँ श्री पार्थप्रतीज्ञा पालकाय नम:

32) ऊँ श्री भीमसेन जय प्रदाय नम:

33) ऊँ श्री भीषणम बुद्धि प्रदाय नम:

34) ऊँ श्री परीक्षित प्राण रक्षणाय नम:

35) ऊँ श्री विपक्ष पक्ष क्षय कृते नम:

36) ऊँ श्री भीष्म शल्य व्यथापहाय नम:

37) ऊँ श्री प्रधुम्न जनकाय नम:

38) ऊँ श्री भद्राभर्त्रे नम:

39) ऊँ श्री नरकासुर विच्छेत्रे नम:

40) ऊँ श्री जाम्बन्ती प्रियाय नम:

41) ऊँ श्री बाणासुर पुरी रोद्रध्रे नम:

42) ऊँ श्री मुचुकुन्द वर प्रदाय नम:

43) ऊँ श्री तृणावर्तासुर ध्वासिने नम:

44) ऊँ श्री त्रयीमूर्तये नम:

45) ऊँ श्री तापत्रय निवारणाय नम:

46) ऊँ श्री मित्रविन्दा नेत्र महोत्सवाय नम:

47) ऊँ श्री दानव मुक्तिदाय नम:

48) ऊँ श्री दधिमन्थ घटी त्रेत्त्रे नम:

49) ऊँ श्री देवदेवाय नम:

50) ऊँ श्री देवकी नन्दनाय नम:

51) ऊँ श्री द्वारकापुर कल्पनाय नम:

52) ऊँ श्री नाना क्रीडा परिच्छदाय नम:

53) ऊँ श्री नवनीत महाचोराय नम:

54) ऊँ श्री नन्दगोपोत्सव स्फूर्तये नम:

55) ऊँ श्री भक्तिगम्याय नम:

56) ऊँ श्री पीतवाससे नम:

57) ऊँ श्री पूतना स्तन पीड़नाय नम:

58) ऊँ श्री परम पावनाय नम:

59) ऊँ श्री प्रकृतये नम:

60) ऊँ श्री बकासुर ग्राहिणे नम:

61) ऊँ श्री बलिने नम:

62) ऊँ श्री बालाय नम:

63) ऊँ श्री मुकुन्दाय नम:

64) ऊँ श्री महामंगलदायककाय नम:

65) ऊँ श्री विराट पुरुष विग्रहाय नम:

66) ऊँ श्री वेणूवादन तत्पराय नम:

67) ऊँ श्री परमानन्दनाय नम:

68) ऊँ श्री मुनिज्ञान प्रदाय नम:

69) ऊँ श्री मयदानव मोहनाय नम:

70) ऊँ श्री पांचाली मान रक्षणाय नम:

71) ऊँ श्री दन्तवक्त्र निवर्हणाय नम:

72) ऊँ श्री राधाप्रेम सल्लापनि वृताय नम:

73) ऊँ श्री रूक्मणी जानये नम:

74) ऊँ श्री पार्थ सार्थ्य निरताय नम:

75) ऊँ श्री पद्मा स्थिताय नम:

76) ऊँ श्री पुराणाय नम:

77) ऊँ श्री लक्ष्मणा बल्लभाय नम:

78) ऊँ श्री तीर्थ पावनाय नम:

79) ऊँ श्री योगज्ञान नियोजकाय नम:

80) ऊँ श्री लीलाक्षाय नम:

81) ऊँ श्री स्तुति सन्तुष्ट मानसाय नम:

82) ऊँ श्री वल्लभाय नम:

83) ऊँ श्री वसुदेव सुताय नम:

84) ऊँ श्री वत्सलक्ष्मपक्षसे नम:

85) ऊँ श्री व्यापिने नम:

86) ऊँ श्री विश्वविमोहनाय नम:

87) ऊँ श्री वृन्दावन प्रियाय नम:

88) ऊँ श्री पौण्डूक प्राण हराय नम:

89) ऊँ श्री यशोदास्तन्य मुदिताय नम:

90) ऊँ श्री यमलार्जुन भन्जाय नम:

91) ऊँ श्री यादवाय नम:

92) ऊँ श्री यमुना तट सच्चारिणे नम:

93) ऊँ श्री शोरये नम:

94) ऊँ श्री शेषशायिने नम:

95) ऊँ श्री सुखवासाय नम:

96) ऊँ श्री शंख चक्र गदा पद्मम पाणये नम:

97) ऊँ श्री शकटासुर भंजनाय नम:

98) ऊँ श्री सर्वदेवाय नम:

99) ऊँ श्री सुनन्द सुह्रदये नम:

100) ऊँ श्री श्री सर्वेश्वराय नम:

101) ऊँ श्री शंख चूड़शिरोहराय नम:

102) ऊँ श्री सत्राजित रत्न वाचकाय नम:

103) ऊँ श्री सत्यभामा प्रियाय नम:

104) ऊँ श्री षोदश स्त्री सहत्रेशाय नम:

105) ऊँ श्री षड़विशंकाय नम:

106) ऊँ श्री साम्ब जनकाय नम:

107) ऊँ श्री विदुरातिथ्य सन्तुष्टाय नम:

108) ऊँ श्री ब्रह्मवृक्ष वरच्छायासीनाय नम:


डॉ लाल थदानी

पूर्व अध्यक्ष राजस्थान सिन्धी अकादमी जयपुर ।