You will be redirected to my new site in

seconds
If Redirect Dosen't Work Click Here

Saturday, August 24, 2019

कामयाबी


कामयाबी 

आंधियां थी तूफ़ान भी आए थे
सी ए बनने के हमने सपने बनाए थे ।
विश्वास अटल था मेहनत दिन रात की
मंजिल तक न थके न लड़खड़ाए थे ।।

मां बाप बड़ों का मिला प्यार आशीर्वाद
जिनके भरोसे हम वक़्त से टकराए थे ।
इष्ट मित्रों अपनों के साथ ने दिलाई सफलता
जीत के गीत सबने मिलकर गुनगुनाए थे ।
डॉ लाल थदानी पूर्व अध्यक्ष  राजस्थान सिंधी अकादमी, जयपुर ।

Live and Love Life
by Dr Lal Thadani
A motivational Blog

drlal2010@gmail.com

Saturday, August 17, 2019

मेरे सतगुरु होए दयाल तो श्रद्धा पूरी हो

मेरे सतगुरु होए दयाल तो श्रद्धा पूरी हो । (राधा स्वामी)

मेरे पिताजी श्री मेठाराम थदानी का जन्म 14 जुलाई 1931 मेबदेरो जतोई नवाब शाह मेहरापुर सिंध प्रांत में हुआ । स्वर्गवास 13/8/19 के पूर्व उनकी अंतिम वाणी मेरे सतगुरु होए दयाल तो श्रद्धा पूरी हो (राधास्वामी)ने मुझे लिखने को प्रेरित किया कि कितनी भी  बड़ी से बड़ी तकलीफ हो अगर आप नियमित रूप से जाप और योग में विश्वास करते हैं तो हर पीड़ा आप हर लेंगे ।

नाम दान,जापऔर योग की महिमा

किसी भी मंत्र या भगवान के नाम की पुनरावृत्ति को जप के नाम से जाना जाता है। जप योग का एक महत्वपूर्ण अंग है। मंत्र का दोहराव है। आत्मा के लिए आध्यात्मिक भोजन है।  अंधे साधकों के हाथ में मशाल की भांति है।  इस युग में, केवल जापा का अभ्यास शाश्वत शांति, आनंद,अनुभव और अमरता प्रदान कर सकता है।

शुरुआत में आपको ध्यान को जप के साथ जोड़ना चाहिए। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं जप अपने आप कम होता जाता है; मात्र ध्यान शेष रह जाता है। यह एक उन्नत चरण है। फिर आप अलग से एकाग्रता का अभ्यास कर सकते हैं। इस संबंध में आप को जो अच्छा लगे, आप कर सकते हैं।

नाम और वस्तु(रूप)अविभाज्य हैं।

विचार और शब्द अविभाज्य हैं।जब भी आप अपने बेटे के नाम के बारे में सोचते हैं, उसका शारीरिक रूप आप की मानसिक आंखों के सामने खड़ा होता है।  यहां तक ​​कि जब आप राम, कृष्ण या किसी गुरु का जप करते हैं, तो उनकी तस्वीर आपके दिमाग में आएगी। इसलिए जप और ध्यान एक साथ चलते हैं।वे अविभाज्य हैं।

जाप भावना से करें।  

जानिए मंत्र का अर्थ  और सब कुछ और हर जगह भगवान की उपस्थिति को महसूस करें।  जब आप जप को दोहराते हैं, तो उसके करीब और करीब आएँ।  सोचिए वह आपके दिल  में चमक रहा है।  वह मंत्र के आपके पुनरावृत्ति को देख रहा है क्योंकि वह आपके दिमाग का साक्षी है।

डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष राजस्थान
सिंधी अकादमी जयपुर ।
Live and Love Life 
by Dr Lal Thadani
A motivational Blog
drlal2010@gmail.com
8005529714


Saturday, January 26, 2019

स्वाइन फ्लू: न डरें न डराएं / संक्रमण से बचाव ही उचित उपाय डॉ लाल थदानी उप मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (स्वा.)

स्वाइन फ्लू: न डरें न डराएं /
संक्रमण से बचाव ही उचित उपाय
डॉ लाल थदानी
उप मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (स्वा.)

स्वाइन फ्लू- H1N1  एक वायरल बुखार है जो वायरस से फैलता है।  यदि आपको सर्दी, खांसी और बुखार हो और यह 2-3 दिनों में ठीक न हो, तो नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा अधिकृत चिकित्सक से H1N1 की जांच कराएं। स्वाइन फ्लू के मामलों में मौसम में अचानक परिवर्तन विशेष रूप से बारिश की वजह से स्वाइन फ्लू का वायरस और घातक हो जाता है। वातावरण में नमी बढ़ने के साथ भी यह तेजी से फैलने लगता है। भारत में घटनायें 2009, 2010, 2012 और 2013 में 2015, 2017 में सबसे ज्यादा रही हैं ।

क्या है स्वाइन फ्लू के लक्षण?
स्वाइन फ्लू के लक्षण भी सामान्य / मौसमी एन्फ्लूएंजा के लक्षणों की तरह ही होते हैं।
नाक का लगातार बहना,
छींक आना,
हल्का बुखार
ठंड लगना,
कमजोरी ,
भूख न लगना
कफ, कोल्ड और लगातार सूखी खांसी
गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना
मांसपेशियों में दर्द या अकडऩ
सिर में भयानक दर्द
नींद न आना, ज्यादा थकान
दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढऩा
कुछ लोगों को उल्टी और दस्त भी हो सकती है

गंभीर संक्रमण का खतरा :
विशेष सावधानी
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को
डायबिटीज , ब्लड प्रेशर , हृदय अथवा अन्य गंभीर रोग ,

न डरें न डराएं : ऐसे करें बचाव :
1: दूरी बनाकर रखें
किसीकिसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो स्वयं भीड़ से बचना चाहिए ।
उससे कम से कम 3 फीट की दूरी बनाए रखें। स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे भी नहीं छूना चाहिए।
बहुत जरूरत पड़ने पर मास्क का या साफ कपड़ा प्रयोग करें ।
बच्चों में इंफ्लेन्ज़ा लक्षण पाए जाने पर अभिभावक उसे स्कूल न भेजें ।

2. गले न मिलें:
अगर किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे हाथ मिलाने और गले मिलने से बचना चाहिए।

3. हाथ साबुन से धोएं :
अपने हाथों को हमेशा साबुन और पानी से करीब 20 सेकंड तक अच्छी तरह से धोएं। ये कई तरह के सामान्य संक्रमणों को रोकने के लिए सबसे बढ़िया उपाय है ।

4. टीका लगवाएं:
इंफ्लेन्ज़ा का टीका लगवाएं। 
H1N1H1N1 संक्रमण से बचाव के लिए यह सबसे बढ़िया रास्ता है।
स्वाइन फ्लू से बचाव इसे नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी उपाय है।
इसका उपचार भी अब मौजूद है।
आराम, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना
शुरुआत में पैरासीटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं।
बीमारी के बढऩे पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है।
डॅाक्टरी परामर्श के बाद ही दवा का सेवन करें।
स्वाइन फ्लू से पहले और बाद में अगर आप सावधानी रखेंगे तो इस बीमारी से बचा जा सकता है. अगर इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो घबराएं नहीं क्योंकि इसका इलाज संभव है.

क्‍या करें:
यह एक संक्रमण बीमारी है जो इंसान से इंसान को लगती है. जब कोई स्वाइन फ्लू का मरीज छींकता है तो उसके आसपास 3 फीट की दूरी तक खड़े व्यक्तियों के शरीर में इस फ्लू का वायरस प्रवेश कर जाता है. अतः आप मरीज से कम से कम 6 फीट की दूरी बना कर रखें.

यदि कोई व्यक्ति अपने छींकते समय मुंह और नाक को हाथ से ढक लेता है तो फिर यदि वह जहां कहीं भी उस हाथ को लगाता है (दरवाजे, खिड़कियां, मेज, कीबोर्ड इत्यादि) वहां यह वायरस चिपक जाता है और फिर वहां से किसी अन्य व्यक्ति के हाथों पर लगकर शरीर में दाखिल हो जाता है.

आप इन निम्‍नलिखित बातों का ध्‍यान रख कर फ्लू को खुद से दूर रख सकते हैं:
1. छींकते समय टिश्यू पेपर से मुंह, नाक को ढकें और फिर उस पेपर को फौरन सावधानी से कचरे के डिब्बे में डाल दें.
2. अपने हाथों को लगातार साबुन से धोते रहें अपने घर, ऑफिस के दरवाजों के हैंडल, की-बोर्ड, मेज आदि साफ करते रहें यदि आपको जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो घर से बाहर और दूसरों के नजदीक ना जाएं.
3. यदि आपको बुखार आई हो तो उसके ठीक होने के 24 घंटे बाद तक घर पर रहें. 
4. लगातार पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन ना हो.
5. घर से बाहर निकल रहे हों तो फेसमास्क पहनकर ही निकलने की कोशिश करें.

स्वाइन फ्लू की आशंका होने पर क्या करें? 
अपनी तबीयत पर गौर करें और यदि आपको बुखार लग रही हो, खांसी आ रही हो, गले में जलन हो रहा हो और सांस लेने में तकलीफ हो रही हो तो तत्काल अपने शहर के नजदीकी अस्पताल में जाकर इसकी जांच करवाएं.

स्‍वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू के लक्षण वैसे तो तो सामान्य जुकाम जैसे ही होते हैं.
1. इस दौरान 100.4°F तक की बुखार आती है.
2. भूख कम हो जाती है और नाक से पानी बहता है.
3. कुछ लोगों को गले में जलन, उल्टी और डायरिया भी हो जाता है.
जिस किसी को भी स्वाइन फ्लू होता है उसमें उपरोक्त लक्षण जरूर दिखाई देते हैं.

फ्लू और सामान्य सर्दी में भेद कैसे करें? 
जब सामान्य सर्दी लगती है तो वह जल्द ही ठीक भी हो जाती है लेकिन फ्लू होने पर वह जल्दी ठीक नहीं होता और उसका प्रभाव अधिक घातक होता है. शरीर में कमजोरी आ जाती है, भूख नहीं लगती और बुखार आती-जाती रहती है. सरदर्द होता है और गले में जलन भी।

हर समय इन सावधानियों का पालन करें :
1. भीड़ भाड़ वाले सार्वजनिक जगहों पर न जाएं.
2. बिना मास्‍क पहने अस्‍पताल में दाखिल न हों.
3. अनजान लोगों से हाथ मिलाने और गले मिलने से बचें.
4. खुली जगहों पर ना थूकें.
5. खांसने, छींकने या नाक साफ करने के बाद आंख, नाक और मुंह पर हाथ कतई न लगाएं. शरीर के ये हिस्से सबसे जल्दी फ्लू की चपेट में आते हैं.
6.जब खाँसी या छींक आये, तो अपने मुंह और नाक को एक टिश्यू या रुमाल से ढक लें ।
7. इस्तेमाल किये टिश्यू का तुरंत और सावधानी के साथ निपटारा करें। उन्हें एक बैग में डाल कर फिर पात्र में फेंकें
8. बार-बार साबुन और पानी से अपने हाथ धोयें
9.स्वच्छ कठोर सतहों  को नियमित साफ़ रखें । उदाहरण के लिए
•  दरवाज़े के हैंडल्स और स्विच
• नल और टॉयलेट फ्लश के हैंडल
• किचन वर्कटॉप्स
• टेलीफोन रिसीवर्स
• कंप्यूटर कीबोर्ड्स
• सुनिश्चित करें कि बच्चे इस सलाह का पालन करें

Action Plan
District Administration
Nodal Officer
DyCmho Health MD Psm
Vetenary
Nigam
Medical and Health
Early Diagnosis Prompt Treatment
Iec : Fm radio, cinema slides
Daily Door to Door Survey with Anm & Asha intern Drs Nursing Students supervised by MO .
Blood slide collection .

Give Temiflu before referring
B category
इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) लोगों के बीच कैसे फैलता है?
यह नया इन्फ्लूएंजा वायरस मौसमी फ्लू के सामान ही फैलता हैं; छोटी बूंदों के रूप में, एक संक्रमित व्यक्ति की नाक और मुंह से, जब वो बात करते हैं खांसते या छींकते हैं। लोग संक्रमित हो सकते हैं । अगर वो इन बूंदों को साँस में लेते हैं और वो किसी व्यक्ति या ऐसी चीज़ को छूते हैं जो कि वायरस से दूषित है (उदाहरण के लिए एक प्रयोग किया ऊतक या दरवाज़े के हैंडल) और फिर अपनी आँख और नाक को छूते हैं।अगर वे इन बूंदों को साँस लोगों को संक्रमित हो सकता है या फिर उनकी नाक या आंखों को छूने अगर वे किसी को या कुछ है कि वायरस से दूषित है (उदाहरण के लिए एक प्रयोग किया ऊतक या दरवाज़े के हैंडल) को छूने से ।

क्या इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) से लोगों की रक्षा करने के लिए कोई टीका है ?

सीजनल फ्लू शॉट से दो या तीन तरह के इन्फ्लूएंजा वायरस, जिसमें H1N1 वायरस भी शामिल है, के खिलाफ रक्षा में मदद मिलेगी। टीका एक इंजेक्शन या एक नाक स्प्रे के रूप में उपलब्ध है। उसके लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

क्या उपचार उपलब्ध है?
कुछ एंटीवायरल दवायें, जैसे कि टैमीफ्लू आपके जीपी के पास उपलब्ध हैं। इससे रोग घटती है और जटिलताओं का खतरा कम होता है। इन दवाओं दुष्प्रभाव का कारण है और इसलिए अपने जीपी केवल उन्हें सुझाएगा यदि लाभ जोखिम पल्ला झुकना नहीं, सभी के लिए उपयुक्त हो सकता है।

www.drlalthadani.in
Please Download n
Share My App
Live Healthy (Dr.Lal)
8005529714
drlal2010@gmail.com

Sunday, January 6, 2019

सुनहले पल /अल्फ़ाज़/डॉ लाल थदानी

सुनहले पल /अल्फ़ाज़/डॉ लाल थदानी

बड़े दिलचस्प है गुजरे हुए वो पल
तेरी यादों के सिलसिले और सुनहले पल ।

भरी दोपहरी हो या हो सर्द रातें
कभी पल, कभी पल-पल, कभी हर पल...

कहने को बहुत है मगर लब खामोश
इस खामोशी में भी  तेरी  बातें हर पल
तुझ में मैं, मुझ में तू तुमसे, तुम पर ही
मेरी दुनिया पल पल हर पल...

अल्फ़ाज़
डॉ लाल थदानी
www.drlalthadani.in
Please Download n
Share My App
Live Healthy (Dr.Lal)
8005529714

Monday, December 31, 2018

Happy Blessed 2019

Lovely, Healthy,
Stress free
New Year Wishes
and Blessings.
Dr Lal Thadani
Dr Deepa Thadani

वर्ष के अंतिम समय का माफीनामा...

    वर्ष के अंतिम समय का माफीनामा...

मैं उन सब से माफ़ी मांगता हूं ,,
कृपया मुझे क्षमा करें ।।

➡वो सभी जो समझते है कि मैं घमंडी हूं
➡वो सभी जो समझते है मैंने उनकी उपेक्षा की
➡वो सभी जिन्हें मेरे व्यवहार से कष्ट पहुंचा है
➡वो सभी जिनको मैं पूरे वर्ष भर मिल नही पाया या उनसे बात भी नही कर पाया
➡वो सभी जिनको मेरे शब्दों से कष्ट पहुंचा हो
➡वो सभी जिनसे मैंने कोई वायदा किया था लेकिन उसको पूरा नही कर पाया
➡जाने अनजाने जिनसे मैं मित्रवत व्यवहार नही कर पाया अथवा जिनके साथ मेरा व्यवहार कठोर रहा ।। कृपया मुझे क्षमा करें ।।

नव वर्ष 2019 में दुखों और कड़वाहट के साथ नहीं मुस्कराते हुए  प्रवेश करें।।
आपको सपरिवार एवं इष्ट मित्रों को स्वास्थ्य , प्रसन्नता के साथ नव वर्ष 2019 की अग्रिम शुभकामनाएं ।

डॉ लाल थदानी

www.drlalthadani.in
Please Download n Share My App
8005529714
Live Healthy (Dr.Lal)

Tuesday, November 6, 2018

A Pollution Free Happy Diwali

https://youtu.be/sufayNy71eI

प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाएं :
स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पाएं

डॉ लाल थदानी                          Dy Cmho Ajmer

डॉ दीपा थदानी                  Prof.Jln Hosp Ajm

https://www.instagram.com/p/B4G0HC2nrXW/?igshid=1mhuwdyoxrp98
संशोधित
http://livenlovelifebylal.blogspot.in/2017/10/blog-post.html?m=1

https://drlalthadani.wordpress.com/2017/10/19/ प्रदूषण-मुक्त-दीपावली-डॉ थदानी /?preview=true

दीपावली खुशियों एवं रोशनी का त्यौहार है। बेशक घर आंगन और देहरी पर दीप जलाएं। बहुत रमणीय भी लगता है। लेकिन लोग पटाखे भी जलाते हैं। जो कुछ पल का मजा वातावरण में जहर घोल देता है। 

दीपावली के दौरान तेज आवाज के पटाखे पर्यावरण के साथ  जन स्वास्थ्य के लिये खतरा पैदा कर सकते हैं।  आतिशबाजी अधिक रोशनी और शोरगुल वाले पटाखों के कारण  जलने, आंख को गंभीर क्षति पहुंचने ,अंधता और कान का पर्दा फटने और बहरापन, रक्तचाप बढ़ने और दिल के दौरे,दमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी स्वा. समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है । 
पटाखों से निकलने वाली आवाज अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाती हैं और यह स्वास्‍थ्‍य के लिए भी हानिकारक होती है। सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाये जाने वाले ‘लक्ष्मी बम’ से 100 डेसिबेल (ध्वनि नापने की इकाई) आवाज आती है और 50 डेसिबेल से तेज़ आवाज़ के स्तर को मनुष्य के लिए हानिकारक माना जाता है। शायद आप नहीं जानते, आवाज के 10 डेसीबल अधिक तीव्र होने के कारण आवाज की तीव्रता दो दोगुनी हो जाती है, जिसका बच्चों, गर्भवती महिलाओं, दिल तथा सांस के मरीजों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।शोर से नवजात बच्चों भी डर जाते है। प्रदूषण पशु-पक्षियों तथा जानवरों के लिये भी अभीष्ठ नहीं है।

दीपावली के समय लोग घर की साफ-सफाई में जुट जाते हैं और  बेकार सामानों को बाहर फेंक देते हैं। इनमें कुछ अजैविक होते हैं और वातावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे सामानों को इधर-उधर ना फेंकें।
पटाखों से सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड आदि हानिकारक गैसें हवा में घुल जाती हैं। दिवाली के बाद अस्पताल आने वाले हृदय रोगों, दमा,नाक की एलर्जी,ब्रोंकाइटिस औरनिमोनिया जैसी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की संख्या अमूमन दोगुनी हो जाती है ।
पटाखों के चलाने से स्थानीय मौसम प्रभावित होता है तथा अनेक बीमारियों की सम्भावना बनती और बढ़ती है ।


Let's celebrate
#pollutionfreediwali🙏
#sayno2crackers
#HappyDiwali
#greendiwali

घटक सेहत पर प्रभाव

1. तांबा श्वास तंत्र में जलन
2. कैडमियम किडनी को हानि,
रक्त अल्पता।
3. सीसा स्नायु तंत्र को हानि
4. मैगनिशियम बुखार
5. सोडियम त्वचा पर असर
6. सल्फर डाइ दम घुटना
ऑक्साइड ऑखों,गले में जलन
7. नाइट्रेट मस्तिष्क को क्षति
बेहोशी की सम्भावना

सावधानी हटी दुर्घटना घटी

1.पटाखों को सुरक्षित जगह पर रखें। उन्हें ज्वलनशील पदार्थों से दूर जाकर ही जलाएँ।

2. वाहनों के आसपास पटाखे नहीं जलाएँ।

3. पटाखे जलाते समय सूती कपड़े पहनें सिन्थेटिक कपडे ज्वलनशील होते हैं।

4. पटाखे जलाते समय घर की खिड़कीऔर दरवाजे बन्द रखें। इससे आग लगने का खतरा घटेगा।

5. हाथ में रखकर फटाके नहीं जलाएँ। बच्चों को वयस्कों/बुजुर्गों की देखरेख में पटाखे जलाने दें।

6. साधारण जली हुई जगह पर तत्काल पानी डालें और दवा लगाएँ।

7. घर में पानी, रेत, कम्बल और दवा काइन्तजाम रखें।

8. धुएँ से दूर रहें। धुएँ में श्वास नहीं लें।

9. जोरदार आवाज करने वाले फटाकों से छोटे बच्चों और अस्वस्थ वृद्धों को दूर रखें। उनसे बहरेपन का खतरा होता है।

भारत का संविधान और अधिकार :

स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी, बाल मजदूरी नियमों की अवहेलना या असावधानी मानव अधिकारों के उलंघन के प्रति सरकार गंभीर है । उल्लेखनीय है कि भारत का संविधान रेखांकित करता है कि स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना केवल राज्यों की ही जिम्मेदारी नहीं है अपितु प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। आर्टिकल 48 अ और आर्टिकल 51 अ (जी) तथा आर्टिकल 21 की व्याख्या से उपर्युक्त तथ्य उजागर होते हैं। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सुरक्षित सीमा (125 डेसीबल) से अधिक शोर करने वाले पटाखों के जलाने पर रोक लगाई है। इसके अलावा शान्तिपूर्ण माहौल में नींद लेने के आम नागरिक के फंडामेंटल अधिकार की रक्षा के लिये उच्चतम न्यायालय ने दीपावली और दशहरे के अवसर पर रात्रि 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक पटाखों के चलाने को प्रतिबन्धित किया है। पटाखों का उपयोग हमारी परम्परा का अंग है। चूँकि हमारी परम्परा पर्यावरण की पोषक रही है इसलिये हमें पर्यावरण हितैषी और सुरक्षित दीपावली मनाना चाहिए। यह काम प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर खुद कर सकता है।
पर्यावरण हितैषी और सुरक्षित दीपावली मनाने के लिये निम्न कदम उठाए जा सकते हैं-
1. पटाखों का कम-से-कम उपयोग। इससे पर्यावरणी नुकसान कम होंगे। कम कचरा पैदा होगा। कचरा निष्पादन पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा।
2. कतिपय प्राकृतिक संसाधनों के बेतहाशा दोहन को लगाम लगाने के लिये कम-से-कम अनावश्यक खरीद। इससे पर्यावरणी नुकसान का स्तर का ग्राफ थमेगा।
3. दीपावली पर कम अवधि के लिये बिजली का उपयोग। ऐसा करने से बिजली उत्पादन करने वाले संसाधनों की खपत पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा।

प्रदूषण मुक्त स्वस्थ जीवन जिये
Lets Promote Pollution Free Healthy Life .

http://www.drlalthadani.com


Download from Play Store
Live Healthy (Dr.Lal)
#liveandlovelife❤
A #motivationalblog
By #drlalthadani