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Monday, December 31, 2018

वर्ष के अंतिम समय का माफीनामा...

    वर्ष के अंतिम समय का माफीनामा...

मैं उन सब से माफ़ी मांगता हूं ,,
कृपया मुझे क्षमा करें ।।

➡वो सभी जो समझते है कि मैं घमंडी हूं
➡वो सभी जो समझते है मैंने उनकी उपेक्षा की
➡वो सभी जिन्हें मेरे व्यवहार से कष्ट पहुंचा है
➡वो सभी जिनको मैं पूरे वर्ष भर मिल नही पाया या उनसे बात भी नही कर पाया
➡वो सभी जिनको मेरे शब्दों से कष्ट पहुंचा हो
➡वो सभी जिनसे मैंने कोई वायदा किया था लेकिन उसको पूरा नही कर पाया
➡जाने अनजाने जिनसे मैं मित्रवत व्यवहार नही कर पाया अथवा जिनके साथ मेरा व्यवहार कठोर रहा ।। कृपया मुझे क्षमा करें ।।

नव वर्ष 2019 में दुखों और कड़वाहट के साथ नहीं मुस्कराते हुए  प्रवेश करें।।
आपको सपरिवार एवं इष्ट मित्रों को स्वास्थ्य , प्रसन्नता के साथ नव वर्ष 2019 की अग्रिम शुभकामनाएं ।

डॉ लाल थदानी

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Live Healthy (Dr.Lal)

Tuesday, November 6, 2018

A Pollution Free Happy Diwali

https://youtu.be/sufayNy71eI

प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाएं :
स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पाएं

डॉ लाल थदानी                          Dy Cmho Ajmer

डॉ दीपा थदानी                  Prof.Jln Hosp Ajm

https://www.instagram.com/p/B4G0HC2nrXW/?igshid=1mhuwdyoxrp98
संशोधित
http://livenlovelifebylal.blogspot.in/2017/10/blog-post.html?m=1

https://drlalthadani.wordpress.com/2017/10/19/ प्रदूषण-मुक्त-दीपावली-डॉ थदानी /?preview=true

दीपावली खुशियों एवं रोशनी का त्यौहार है। बेशक घर आंगन और देहरी पर दीप जलाएं। बहुत रमणीय भी लगता है। लेकिन लोग पटाखे भी जलाते हैं। जो कुछ पल का मजा वातावरण में जहर घोल देता है। 

दीपावली के दौरान तेज आवाज के पटाखे पर्यावरण के साथ  जन स्वास्थ्य के लिये खतरा पैदा कर सकते हैं।  आतिशबाजी अधिक रोशनी और शोरगुल वाले पटाखों के कारण  जलने, आंख को गंभीर क्षति पहुंचने ,अंधता और कान का पर्दा फटने और बहरापन, रक्तचाप बढ़ने और दिल के दौरे,दमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी स्वा. समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है । 
पटाखों से निकलने वाली आवाज अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाती हैं और यह स्वास्‍थ्‍य के लिए भी हानिकारक होती है। सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाये जाने वाले ‘लक्ष्मी बम’ से 100 डेसिबेल (ध्वनि नापने की इकाई) आवाज आती है और 50 डेसिबेल से तेज़ आवाज़ के स्तर को मनुष्य के लिए हानिकारक माना जाता है। शायद आप नहीं जानते, आवाज के 10 डेसीबल अधिक तीव्र होने के कारण आवाज की तीव्रता दो दोगुनी हो जाती है, जिसका बच्चों, गर्भवती महिलाओं, दिल तथा सांस के मरीजों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।शोर से नवजात बच्चों भी डर जाते है। प्रदूषण पशु-पक्षियों तथा जानवरों के लिये भी अभीष्ठ नहीं है।

दीपावली के समय लोग घर की साफ-सफाई में जुट जाते हैं और  बेकार सामानों को बाहर फेंक देते हैं। इनमें कुछ अजैविक होते हैं और वातावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे सामानों को इधर-उधर ना फेंकें।
पटाखों से सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड आदि हानिकारक गैसें हवा में घुल जाती हैं। दिवाली के बाद अस्पताल आने वाले हृदय रोगों, दमा,नाक की एलर्जी,ब्रोंकाइटिस औरनिमोनिया जैसी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की संख्या अमूमन दोगुनी हो जाती है ।
पटाखों के चलाने से स्थानीय मौसम प्रभावित होता है तथा अनेक बीमारियों की सम्भावना बनती और बढ़ती है ।


Let's celebrate
#pollutionfreediwali🙏
#sayno2crackers
#HappyDiwali
#greendiwali

घटक सेहत पर प्रभाव

1. तांबा श्वास तंत्र में जलन
2. कैडमियम किडनी को हानि,
रक्त अल्पता।
3. सीसा स्नायु तंत्र को हानि
4. मैगनिशियम बुखार
5. सोडियम त्वचा पर असर
6. सल्फर डाइ दम घुटना
ऑक्साइड ऑखों,गले में जलन
7. नाइट्रेट मस्तिष्क को क्षति
बेहोशी की सम्भावना

सावधानी हटी दुर्घटना घटी

1.पटाखों को सुरक्षित जगह पर रखें। उन्हें ज्वलनशील पदार्थों से दूर जाकर ही जलाएँ।

2. वाहनों के आसपास पटाखे नहीं जलाएँ।

3. पटाखे जलाते समय सूती कपड़े पहनें सिन्थेटिक कपडे ज्वलनशील होते हैं।

4. पटाखे जलाते समय घर की खिड़कीऔर दरवाजे बन्द रखें। इससे आग लगने का खतरा घटेगा।

5. हाथ में रखकर फटाके नहीं जलाएँ। बच्चों को वयस्कों/बुजुर्गों की देखरेख में पटाखे जलाने दें।

6. साधारण जली हुई जगह पर तत्काल पानी डालें और दवा लगाएँ।

7. घर में पानी, रेत, कम्बल और दवा काइन्तजाम रखें।

8. धुएँ से दूर रहें। धुएँ में श्वास नहीं लें।

9. जोरदार आवाज करने वाले फटाकों से छोटे बच्चों और अस्वस्थ वृद्धों को दूर रखें। उनसे बहरेपन का खतरा होता है।

भारत का संविधान और अधिकार :

स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी, बाल मजदूरी नियमों की अवहेलना या असावधानी मानव अधिकारों के उलंघन के प्रति सरकार गंभीर है । उल्लेखनीय है कि भारत का संविधान रेखांकित करता है कि स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना केवल राज्यों की ही जिम्मेदारी नहीं है अपितु प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। आर्टिकल 48 अ और आर्टिकल 51 अ (जी) तथा आर्टिकल 21 की व्याख्या से उपर्युक्त तथ्य उजागर होते हैं। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सुरक्षित सीमा (125 डेसीबल) से अधिक शोर करने वाले पटाखों के जलाने पर रोक लगाई है। इसके अलावा शान्तिपूर्ण माहौल में नींद लेने के आम नागरिक के फंडामेंटल अधिकार की रक्षा के लिये उच्चतम न्यायालय ने दीपावली और दशहरे के अवसर पर रात्रि 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक पटाखों के चलाने को प्रतिबन्धित किया है। पटाखों का उपयोग हमारी परम्परा का अंग है। चूँकि हमारी परम्परा पर्यावरण की पोषक रही है इसलिये हमें पर्यावरण हितैषी और सुरक्षित दीपावली मनाना चाहिए। यह काम प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर खुद कर सकता है।
पर्यावरण हितैषी और सुरक्षित दीपावली मनाने के लिये निम्न कदम उठाए जा सकते हैं-
1. पटाखों का कम-से-कम उपयोग। इससे पर्यावरणी नुकसान कम होंगे। कम कचरा पैदा होगा। कचरा निष्पादन पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा।
2. कतिपय प्राकृतिक संसाधनों के बेतहाशा दोहन को लगाम लगाने के लिये कम-से-कम अनावश्यक खरीद। इससे पर्यावरणी नुकसान का स्तर का ग्राफ थमेगा।
3. दीपावली पर कम अवधि के लिये बिजली का उपयोग। ऐसा करने से बिजली उत्पादन करने वाले संसाधनों की खपत पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा।

प्रदूषण मुक्त स्वस्थ जीवन जिये
Lets Promote Pollution Free Healthy Life .

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Monday, November 5, 2018

Know 4 Hormones 2 be Happy : Dr Deepa/ Dr Lal Thadani

Know 4 Hormones 2 be Happy : Dr Deepa/ Dr Lal Thadani

There are four hormones which determine our happiness:*

1. Endorphins,
2. Dopamine,
3. Serotonin, and
4. Oxytocin.

It is important we understand these hormones, as we need all four of them to stay happy.

Let's look at the first hormone the Endorphins. *When we exercise, the body releases Endorphins.* This hormone helps the body cope with the pain of exercising. We then enjoy exercising because these *Endorphins will make us happy. Laughter is another good way of generating Endorphins. We need to spend 30 minutes exercising every day to get our day's dose of Endorphins.*

*The second hormone is Dopamine*. In our journey of life, we accomplish many little and big tasks, it releases various levels of Dopamine. When we get appreciated for our work at the office or at home, we feel accomplished and good, that is because it releases Dopamine. *This also explains why most housewives are unhappy since they rarely get acknowledged or appreciated for their work*.

*The third hormone Serotonin is released when we act in a way that benefits others.* When we transcend ourselves and give back to others or to nature or to the society, it releases Serotonin. Even, providing useful information on the internet like writing information blogs, answering peoples questions on Quora or Facebook groups will generate Serotonin. That is because we will use our precious time to help other people via our answers or articles.

*The final hormone is Oxytocin, is released when we become close to other human beings.* When we hug our friends or family Oxytocin is released. *The "Jadoo Ki Jhappi" from Munnabhai does really work.* Similarly, when we shake hands or put our arms around someone's shoulders, various amounts of Oxytocin is released.

*So, it is simple :*
*We have to exercise every day to get Endorphins,*

*We have to accomplish little goals and get Dopamine,*

*We need to be nice to others to get  Serotonin &*

*Finally hug our kids, friends, and families to get Oxytocin and we will be happy. When we are happy, we can deal with our challenges and problems better.*

Thursday, October 18, 2018

इंसानियत जिंदा रखने के लिए जिंदा होना जरूरी है । भुखमरी को जो भूल जाए वो मगरूरी है ।।  डॉ लाल थदानी

इंसानियत जिंदा रखने के लिए जिंदा होना जरूरी है ।
भुखमरी को जो भूल जाए वो मगरूरी है ।।  डॉ लाल थदानी

कुछ दिनों से इस तस्वीर ने उद्ववेलित कर रखा है । फ़ोटो खींचने के दौरान फोटोग्राफर की आंख से पानी अवश्य बहा होगा और उस दृष्टि को उसे सर्वोच्च पुरुस्कार से भी नवाजा गया । मगर इनाम पाने वाले को एक की छोटी सी टिपण्णी ने उसे अंदर तक इतना झकझोर  दिया कि  उसने उहापोह से निकलने के लिए अपनी इहलीला समाप्त करना बेहतर समझा ।

खैर भुखमरी की जिस तस्वीर का जिक्र किया गया है से नाम दिया गया था  "The vulture and the little girl "
इस तस्वीर में एक गिद्ध भूख से मर रही एक छोटी लड़की के मरने का इंतज़ार कर रहा है ।
इसे एक साउथ अफ्रीकन फोटो जर्नलिस्ट केविन कार्टर ने 26 मार्च 1993 में  सूडान के अकाल के समय खींचा था और इसके लिए उन्हें पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । लेकिन कार्टर इस सम्मान का आनंद कुछ ही दिन उठा पाए क्योंकि कुछ महीनों बाद 33 वर्ष की आयु में उन्होंने अवसाद से आत्महत्या कर ली ।
दरअसल जब वे इस सम्मान का जश्न मना रहे थे तो सारी दुनिया में प्रमुख चैनल और नेटवर्क पर इसकी  चर्चा हो रही थी । उनका अवसाद तब शुरू हुआ जब एक 'फोन इंटरव्यू' के दौरान किसी ने पूछा कि उस लड़की का क्या हुआ? कार्टर ने कहा कि वह देखने के लिए रुके नहीं क्यों कि उन्हें फ्लाइट पकड़नी थी । इस पर उस व्यक्ति ने कहा ,
"मैं आपको बता रहा हूँ कि उस दिन वहां दो गिद्ध थे जिसमें एक के हाथ में कैमरा था  !!!"
बताया गया कि कार्टर फोटो शूट से पूर्व वहां 20 मिनट तक रुका रहा कि कब बच्ची गिरे और गिद्ध झपटा मारे ।
इस कथन के भाव ने कार्टर को इतना विचलित कर दिया कि वे अवसाद में चले गये और अंत में आत्महत्या कर ली ।
किसी भी स्थिति में कुछ हासिल करने से पहले  मानवता आनी ही चाहिए । कार्टर आज जीवित होते अगर वे उस बच्ची को उठा कर यूनाईटेड नेशन्स के फीडिंग सेंटर तक पहुँचा देते जहाँ पहुँचने की वह कोशिश कर रही थी ।
आज भी हंगर इंडेक्स में कई देश बदतर स्थिति में है । मगर फाइव स्टार होटलों या एसी कमरों में बैठकर निर्णय लेने वाले अधिकारी या हृदयहीन जनप्रतिनिधि खुद हकीकत का सामना करने मैदान में उतरे तो स्थितियों को बदत्तर होने से पूर्व टाला जा सकता है । मगर क्या आज के भाई भतीजावाद के युग में ऐसा संभव है । आज दशहरा है ।  नवरात्रों का समापन भी है ।
प्रतीक स्वरूप बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में विजयदशमी पर्व  हर साल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है । मगर हमारे अंदर के रावण को , अहंकार, लोभ, लालच, झूठ, दम्भ, आदि जैसे विकारों को क्या हम जला पाए हैं आज तक । काश ऐसा संभव हो पाता । काश मैं कुछ कर पाता ।

डॉ लाल थदानी
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Thursday, September 6, 2018

जातिगत कानूनन भेदभाव के खिलाफ आक्रोश / डॉ लाल थदानी

जातिगत कानूनन भेदभाव के खिलाफ आक्रोश / डॉ लाल थदानी

आज का भारत बंद आह्वान अत्यंत सफल रहा है । आमजन स्वेच्छा से इस आंदोलन से जुड़ा है ।  जिनको आरक्षण का वास्तव में लाभ मिलना चाहिए हम सभी चाहते हैं उन्हें लाभ मिले । मगर अभी तक रसूखदारों और ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी, नेतागण, और उनके परिवारों को असहनीय लाभ पर लाभ मिल रहा है । आखिर कुछ तो मापदंड तय हो ।जन प्रतिनिधि और सरकारों को पता चलना चाहिए कि बांटो और राज करने की नीति अब भारत देश में न चला है और नहीं चलाई जा सकती है । भारत का जन-सामान्य जाग्रत हो चुका है और इस तरह के किसी भी जातिगत कानूनन भेदभाव के पूर्णतया खिलाफ है । इसकी हर स्तर पर  भर्त्सना की जानी चाहिए , विरोध लाजिमी है और करना भी चाहिए ।
हम सभी को चाहिए कि भाई भाई को, समाज को आपस में बांटने वाले इस जातिगत भेदभावपूर्ण कानून का एकजुट विरोध करते हुए इसके प्रति लोगों को जागरुक करें ।

धन्यवाद
डाॅ लाल थदानी
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Tuesday, September 4, 2018

मेरा परिचय / डॉ लाल थदानी

           मेरा परिचय

मैं किसी को दे ही क्या सकता हूँ  

मेरे पास देने के लिए है भी क्या 

मेरी शख्सियत,मेरी अहमियत,मेरा वजूद 

मेरा परिचय कुछ भी नहीं शून्य बस एक बूँद 

फिर भी मैं नकारा नहीं और ना ही स्वार्थी 

मैं बूँद अमर हो जाऊं जो मिले कोई स्वाति 

मेरा गम मेरा अपना है मगर मेरी खुशी पराई 

खाक-ए-शरीर बाद भी जिंदा रहूंगा मेरे भाई

डॉ लाल थदानी

Monday, September 3, 2018

No one remembers the girl Yogamaya interchanged with Krishna, a boy baby Dr Lal Thadani

No one remembers  the girl Yogamaya interchanged with Krishna, a boy baby
Dr Lal Thadani
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No one remembers  the girl baby born on the same day who was interchanged with Krishna, a boy baby, to save his life. The boy's life was precious but the girl was born to sacrifice her life. Today is not only the birthday of Krishna but also of Yogamaya.

It is said that Yogmaya flew off to Heavens freeing herself from the clutches of Kansa while announcing to Kansa that your killer has been born. Scriptures do not clearly  mention that she too got killed like other siblings of Krishna. However more knowledgeable are requested to throw light on it.

Yogmaya was also an incarnation of Shakti who came to be born along with the incarnation of Lord Vishnu to keep some old promise. When Kansa caught her by her feet and hurled her to the ground, she flew towards the heaven, saying “Kansa, your killer has already taken birth. I could have also killed you but since you caught me by my feet, I take it as your expression of humility and am pardoning you”.

*Krishna* was born in the darkness of the night, into the locked confines of a jail.

However, at the moment of his birth, all the guards fell asleep, the chains were broken and the barred doors gently opened.

Similarly, as soon as *Krishna* ( Chetna, Awareness ) takes birth in our hearts, all darkness ( Negativity ) fades.

All chains ( Ego, I, Me, Myself ) are broken.

And all prison doors we keep ourselves in ( Caste, Religion, Profession, Relations etc )  are opened.

And that is the real Message And Essence of Janmashtmi.