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Monday, February 14, 2022

1.25 करोड़ के लिए MBBS डिग्री गिरवी रखी और पत्नी का इलाज कराया / डॉ लाल थदानी


पत्नी को मौत के मुंह से खींच लाया डॉक्टर पति:इलाज के 1.25 करोड़ के लिए MBBS डिग्री गिरवी रखी, बोला- 7 जन्म का वादा है, मरने कैसे देता

पाली
इस Valentine's Day पर आपको डॉक्टर सुरेश चौधरी और उनकी पत्नी की प्रेम कहानी जरूर पढ़नी चाहिए। पत्नी को मौत के मुंह से वापस लाने के लिए डॉक्टर ने अपनी नौकरी दांव पर लगा दी। इलाज के लिए MBBS की डिग्री गिरवी रखकर 70 लाख का लोन लिया। इलाज पर सवा करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुए।

पाली के खैरवा गांव के 32 वर्षीय डॉक्टर सुरेश चौधरी पीएचसी में पोस्टेड हैं। पत्नी व 5 साल के बच्चे के साथ गांव में ही रहते हैं। मई 2021 में उनकी खुशहाल जिंदगी में भूचाल सा आ गया। कोरोना की दूसरी लहर पीक पर थी। उनकी पत्नी अनिता (अंजू) चौधरी को बुखार आया और 13 मई को रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई। तबीयत बेहद ज्यादा बिगड़ गई।

अंजू को बांगड़ हॉस्पिटल लेकर गए, लेकिन वहां बेड नहीं मिला। इसके बाद 14 मई को जोधपुर एम्स में भर्ती करवाया। दो दिन वहां रहने के बाद रिश्तेदार को पत्नी के पास छोड़ ड्यूटी पर आ गए, क्योंकि कोरोना पीक पर था और डॉक्टरों को छुट्‌टी नहीं मिल रही थी।

30 मई को जोधपुर एम्स में पत्नी से मिलने पहुंचे तो हालत और ज्यादा बिगड़ गई थी। वे छोटे वैंटिलेटर पर थीं और लंग्स 95 प्रतिशत तक खराब हो चुके थे। डाॅक्टरों ने बताया कि बचना मुश्किल है, लेकिन सुरेश ने हार नहीं मानी और पत्नी को अहमदाबाद ले गए। वहां 1 जून को प्राइवेट हॉस्पिटल जायड्स में भर्ती करवाया।

87 दिन ईसीएमओ मशीन पर रखा, रोज का खर्च 1 लाख से ज्यादा
अंजू वजन 50 किलो से गिरकर 30 किलो हो गया था। बॉडी में खून महज डेढ़ यूनिट बचा था। अंजू को ईसीएमओ मशीन पर लिया। इस मशीन के जरिए हार्ट व लंग्स बाहर से ऑपरेट होते हैं। यहां का रोजाना का खर्च एक लाख रुपए से ज्यादा था। सुरेश कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे थे, लेकिन उनका एक ही मकसद था...पत्नी की जान बचाना।

आखिर ईश्वर ने इनकी सुनी और पूरे 87 दिन इस मशीन पर रहने के बाद अनिता के लंग्स में सुधार हुआ और वे फिर से बोलने लगीं। कुछ ही दिनों में उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।


पत्नी के इलाज के लिए ऐसे जुटाए सवा करोड़ रुपए
- 70 लाख एमबीबीएस की डिग्री गिरवी रख बैंक से लोन लिया।
- 10 लाख सेविंग थी।
- 20 लाख साथी डॉक्टर्स व स्टॉफ ने अभियान चलाकर उन्हें दिए।
- 15 लाख में खारड़ा गांव में प्लॉट बेचा
- शेष राशि रिश्तेदारों से ली।
(डॉक्टर की सैलरी करीब 90 हजार है और लोन की किश्त 01 लाख 16 हजार आ रही है। उन्हें करीब 4 साल तक लोन चुकाना है।)

2012 में हुई थी शादी
डॉक्टर सुरेश चौधरी की 25 अप्रेल 2012 को बाली की अनिता(अंजू) चौधरी से शादी हुई। साल 2013 में जोधपुर से एमबीबीएस पूरा किया। चार जुलाई 2016 को बेटे कूंज चौधरी का जन्म हुआ। अंजू हाऊस वाइफ हैं। उन्होंने M.A किया है।

पति की जिद के कारण इस दुनिया में हूं
अंजू कहती हैं मैं जिंदा हूं तो सिर्फ पति की जिद ओर जुनून के कारण। वहीं सुरेश का कहना है कि सात जन्म तक साथ निभाने का वादा किया है। यूं आंखों के सामने कैसे मरने देता। पैसे तो और कमा लूंगा, लेकिन अंजू को कुछ हो जाता तो शायद मैं भी जिंदा नहीं रहता।

डॉ लाल थदानी 
वरिष्ठ #जनस्वास्थ्यविशेषज्ञ
#अल्फ़ाज़_दिलसे
अध्यक्ष इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
(सर्विस डॉक्टर्स विंग)
8005529714
drlal2020@gmail.com

Saturday, February 5, 2022

है अजर अमर लता मंगेशकर/ डॉ लाल थदानी

ये कैसा मौसम ले आया तू बसंत 
हमारी कोकिल कंठ लीन हुई अनंत 
सबके सांसों की सांस में रची बसी सब कहन
लता मंगेशकर का  हुआ दुखद निधन 
दादा फालके से पुरुस्कृत है भारत रत्न 
राष्ट्रीय सम्मान से गौरवान्वित हमारी लता बहिन
आंखों में हैं आसूं गीत लता के लबों पर   
अजर अमर है स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर 
जिसके गीतों से जग सारा रहेगा सदा रोशन 
सजदे लता के नाम से हमारा अहले वतन
ये सारा वतन करे अर्पित श्रद्धा सुमन
ज़िंदा हैं हम तुझसे "लता" शत शत नमन

डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे
06.02.2022

Sunday, January 23, 2022

मेरी डायरी / डॉ लाल थदानी

मेरी डायरी जानती है
मेरे जीवन के उतार चढ़ाव
मेरी व्यक्तिगत सोच, अनुभव,  
और जन हित भावनाऐं,
रिश्तों के तिलस्मी बाजार में
पल पल बनते बिगड़ते 
बिकते सम्पर्क-संबंध , 
मेरी शक्ति और दुर्बलताऐं ,
समस्त जीवन का
लेखा-जोखा ,विश्लेषण 
क्रिया-प्रतिक्रियाऐं  
न कोई रिश्ते बुनता न गिनाता
काश मैं कुछ कर पाता
अल्फ़ाज़_दिलसे आओ
नए सिरे से समझाएं
एक नया संसार बनाएं

डॉ लाल थदानी   
#अल्फ़ाज़_दिलसे
23.1.2022
#LiveAndLoveLifeBYLal

Sunday, November 14, 2021

फिर से जी ले अल्हड़ बचपन / डॉ लाल थदानी

ए मेरे मन किस बात का है गम 
जिन्दा कर अपना अल्हड़ बचपन
क्यों ऊहापोह, उधेड़बुन और शिकन
उमर पचपन में देख बालमन बचपन
आ फिर से जी ले निर्बाध बचपन

 रिश्तों की पौध क्यों सूख रही है
महके बगिया खिले चमन सोचे बचपन
बारिश में बहाएं कागज़ की कश्ती 
पकड़े, ठहाका मारे अबोध बचपन
आ फिर से जी ले निर्बाध बचपन

आओ फिर बनाएं मिट्टी के घरोंदे
कूद कर खुद ही रौंधे चंचल बचपन
सूरज रोज क्यों डूबे पश्चिम दिशा में
चंदा तारे क्या बतियाए सोचे बचपन
आ फिर से जी ले निर्बाध बचपन

झूठ बोलकर भी सच्चे लगते थे
लड़कर अगले दिन गले लगते थे
रिश्ते सचमुच बड़े अच्छे लगते थे
सब रंगों में एक ही रंग अनोखा बचपन
आ फिर से जी ले निर्बाध बचपन

डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे
14.11.2021

Saturday, September 25, 2021

लाडली मेरी लाडली नेहल मेरी लाडली / डॉ लाल थदानी

डॉ लाल थदानी ने अपनी प्यारी दुलारी बिटिया 
नेहल की शादी में उनकी और दामाद बेटा 
सीए तरुण नेभनानी के विशेष अनुग्रह पर  
विदाई गीत लिखा और अजमेर क्लब में  
शिद्दत से गाते हुए सभी बेटी 
बहु को समर्पित किया है ।  
            
थीम थी केसरिया ।




लाडली मेरी लाडली नेहल मेरी लाडली ।  

Please यू ट्यूब पर जाकर 
like, comment and Share करें ।   

8005529714 
drlal2010@gmail.com 

लाडली मेरी लाडली नेहल मेरी लाडली
छोड़कर बाबुल का घर 
बेटी मेरी ससुराल चली

केसरिया रंगों से  बेटी तू नहाए
सुख मिले तुझको कभी 
दुख न छू पाए 
तरुण संग खिलखिलाए 
मेरी लाडली

आसां है शादी की रस्में निभा लेना
मुश्किल है मगर बेटी को जुदा कर लेना

बचपन से जिसको हमने नाजों से पाला
मेहमां की तरह उसको आज विदा कर डाला
पापा मम्मी की शान बढ़ाए 
मेरी लाडली

डॉ लाल थदानी 
ने लिखा और गाया है

#अल्फ़ाज़_दिलसे
8005529714
drlal2010@gmail.com


Lyrics Dr Lal Thadani
Music Dr Lal Thadani
Singer Dr Lal Thadani



https://youtu.be/EFDqK5UjgK8

Saturday, August 28, 2021

सच्चे मित्रों का रहूं मोहताज़ / डॉ लाल थदानी


सबके उद्गार लिखती है 
मेरी कलम मेरी दवात
मेरे दिल से निकलता है 
मेरा हर अल्फ़ाज़
सादगी से कहता हूं मैं 
हर किसी की बात
लोग जलें या डरें 
इसमें मेरा नहीं कोई दोष
मैं शायर हूं लिखता हूं 
सच्चाई से जज़्बात
इसलिए सबके दिलों में हूं
बसता हूं बनकर आवाज़ 
मेरी शोहरत मेरा नाम है,
जीने का यही मेरा अंदाज़
अच्छे सच्चे मित्रों का मैं
भक्तिपूर्वक रहूं मोहताज

डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे 
28.8.2021

Thursday, August 26, 2021

कान्हा तो कान्हा ही रहेगा / डॉ लाल थदानी

लघु कथा
कान्हा तो कान्हा ही रहेगा / डॉ लाल थदानी

बेचारा गरीब सुदामा चावल की पोटली और 
राखी लेकर आधुनिक अमीर कृष्ण के पास गया । उसने ही तो दोस्तों को मैसेज किया था । वो भी अंग्रेजी में । छोटा सा मोबाइल लेकर सुदामा सबको मेसेज दिखाता फिरा । 

You guy's whenever you happen to be here please visit ( जब भी आपका आना हो कृपया मेरे पास जरूर आना ) । भोला भाला सुदामा ने समझा राखी और जन्माष्टमी का शुभ मौका है ।
मिल आता हूं । गूजर मोहल्ले में साथ साथ खेलते थे।  पता नहीं पहचानेगा या नहीं । सो पहुंच गया डरता झिझक्ता। 
 बेचारा सुदामा ।

तीस साल पहले की पढ़ाई और आज की पढ़ाई में दिन रात का फर्क था । हाई टेक शहर का कान्हा आज भी नटखट है । सातों युगों का इतिहास उठाकर देखो । कान्हा तो कान्हा ही रहेगा । रिझाने वाला , सताने वाला । बस बदलाव आया तो समय के हिसाब से सोच में , पहनावे में , ऊंच नीच , अमीरी गरीबी में । अब तो सात युगों के बाद माटी की खुशबू बिखर गई  कारों के काफिले के साथ , ऊंची ऊंची इमारतों की दीवारों और नींव में दब सी गई है । चकाचौंध रोशनी में अपने आप से दूर होते नौकरी और छोकरी के पीछे भागने वालों को खुशबू आए भी तो कहां से । कोरोना ने नाक पर मास्क की परत और चढ़ा दी । भाव शून्य व्यक्ति लिखे खुद समझे खुद ।

बड़े शहर में रहने वाले कृष्ण को छोटे शहर के छोटे कद पास सुदामा क्यों भाने लगा ।
ना फोन की घंटियां सुनी गई और न फोन उठाया गया । सुदामा समझ गया। अभी कृष्ण अवसाद में है । शायद #anxiety या फिर #splitpersonality 

सोचा था कृष्ण को सरप्राइज़ दूंगा । खुद कृष्ण लीला के आगे सुदामा आश्चर्यचकित हो गया । लेकिन गरीब के मुंह से दुआएं ही निकलती हैं । जो दे उसका भला जो ना दे उसका भी भला । सुदामा ने उसे भी दुआएं दी । जल्द स्वस्थ होने की मंगलकामना देता हुआ सुदामा उल्टे पांव अपने घर लौट आया । 

#अल्फ़ाज़_दिलसे

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-Dr Lal Thadani
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