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Friday, February 26, 2021

#अल्फ़ाज़_दिलसे / डॉ लाल थदानी

#अल्फ़ाज़_दिलसे
मेरे मन तू कहता जा बात दिल से लिखता जाऊं 
तेरे उद्गारों पर अल्फा़ज़ दिल से लिखता जाऊं ।

अंतर पीड़ा से ही होता है काव्य का सृजन 
अनकही वेदना पर किताब दिल से लिखता जाऊं ।

जज़्बातों का समुंदर और उफनती लहरों की पीड़ा
शब्दों का बांध बन जज़्बात दिल से लिखता जाऊं ।

दिल के छालों पर मलहम लगाना आसान नहीं
शायरी बन श्याही से कागज़ दिल से लिखता जाऊं ।

डॉ लाल थदानी , उप अधीक्षक, ज.ला.ने.हॉस्पिटल, अजमेर ।
पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान
सिंधी अकादमी, जयपुर ।

#अल्फ़ाज़_दिलसे
26.02.2021

 https://www.facebook.com/545811152095990/posts/4147865401890529/?sfnsn=wiwspmo

Saturday, February 20, 2021

सब गमगीन थे डॉ दत्ता की मौत पर मगर तालियां बजाना भी नहीं भूले उनकी उपलब्धियों पर / डॉ लाल थदानी

जो न दबाव में झुका न बीमारी से  टूटा 
अपनी शर्तों पर जिए डॉ बी एस दत्ता


*जे एल एन अस्पताल अजमेर में न्यूरो सर्जन डॉ बी एस दत्ता का हुआ निधन* प्रशासनिक अधिकारियों को बहुत बड़ी नसीहत दे गए डॉ बी एस दत्ता । वे वीआईपी कल्चर के हमेशा  विरुद्ध रहे । किसी के न दबाव में झुके न बीमारी से  टूटे मगर डॉ बी एस दत्ता अंतिम समय तक अपनी शर्तों पर जिए । वे कोरोना को तो जी गए । मगर कैंसर को नहीं जीत सके । पिछले कुछ दिनों से मेंदांता अस्पताल में उनका चल रहा था इलाज । 

मेदांता रेफर होने से पूर्व वे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती रहे और मुझे उनका हालचाल पूछने का सौभाग्य मिला । बहुत कमजोर हो चले थे फिर भी वे मुस्कुराए और कहा जीत लेंगे बाजी हम तुम । पारिवारिक मित्र मोहन सोनी के जरिए कोरोना के दौरान डॉ दत्ता ने मेरा हाल चाल भी पूछा था । कोरोना उपचार के दौरान उनका एक वीडियो वायरल हुआ "मन  रे तू काहे न धीर धरे ।"। उनके और मेरे बच्चे साथ साथ अजमेर क्लब के तरणताल में तैरना सीखे थे ।  मिसेज दत्ता श्रीमती मनप्रीत कौर और मेरी श्रीमती डॉ दीपा थदानी रोज डॉ बीएस दत्ता उम्दा गायक भी थे । 

बहुत कम लोग जानते हैं की पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान उन्हें टी सीरीज की तरफ से मोहम्मद रफी के गीत गाने का निमंत्रण मिला । बहुत सोच विचारने के बाद उन्होंने वह ऑफर ठुकरा दी और कई बार बातचीत के दौरान उन्हें इस बात का मलाल भी रहा । वह ऑफर बाद में सोनू निगम को  मिला और वे सुप्रसिद्ध  गायक बने ।

प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उनके संबंध हमेशा टकराव भरे रहे । और यह बहुत बड़ी नसीहत भी है विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए जो गरीब मरीजों की लाइन छोड़कर उनके एक फोन पर उनके मिलने वाले मरीजों को वीआईपी ट्रीटमेंट देते हैं । ये नसीहत प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी है जो डॉ दत्ता जैसे व्यक्तित्व से टकराने का दंभ भरते हैं और अखबार की सुर्खियों के माध्यम से पता चलता है कि उन्हें मुंह की खानी पड़ी । 
उसी दौर में करीब 9 वर्ष पूर्व डॉ दत्ता ने बी आर एस की सरकार को अर्जी भिजवा दी और काफी समय तक वे चर्चा में रहे ।

वर्ष 2005 में डॉ दत्ता का जोधपुर तबादला कर दिया था। वहीं जोधपुर से अजमेर आए न्यूरोसर्जन डॉ निषिद भार्गव ने कॉलेज प्रशासन से मांग की थी कि उन्हें 24 घंटे एक रेजीडेंट डॉक्टर चाहिए। उन्हें नहीं दिया गया और वे रिजाइन कर चले गए। परिणामस्वरूप वार्ड बंद करने की नौबत आ गई। इसके बाद डॉ दत्ता को सप्ताह में तीन दिन जेएलएन अस्पताल की जिम्मेवारी सौंपी गई और शेष तीन दिन जयपुर से चिकित्सक को लगाया गया था। बाद में सरकार ने दो माह बाद डॉ. दत्ता का अजमेर तबादला कर दिया था। एक एम आई निरीक्षण 2015 के दौरान उन्हें उदयपुर भी भेजा गया । इस दौरान अस्पताल आने वाले सड़क हादसे के गंभीर रोगियों को जयपुर के एसएमएस अस्पताल रैफर किया जाने लगा था। जयपुर रैफर किए जाने वाले कई रोगियों की बीच रास्ते में मौत हो जाती थी। 

वरिष्ठ पत्रकार गिरधर तेजवानी ने 25 मई 2013 को अजमेर नामा में लेख लिखा की डॉ बीएस दत्ता की उपस्थिति और अनुपस्थिति हमेशा चर्चा का विषय रही । वे अनुशासन और सफाई प्रिय थे और नौकरी की तो कभी भी परवाह नहीं की । उनमें आत्मविश्वास इतना कूट-कूट कर भरा हुआ था कि वह चाहते तो 4 गुना अधिक दामों में किसी भी प्राइवेट अस्पताल में लग सकते थे ।

जाने माने पत्रकार रजनीश रोहिल्ला ने उनके लिए लिखा है कि *अदभुत थे डाॅक्टर दत्ता, गरीबों के भगवान थे* । डाॅ दत्ता अदभुत, विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। डाॅ दत्ता चिकित्सा विज्ञान के लिए वरदान थे । रोहिल्ला जी बताते हैं कि एक दिन डाॅ दत्ता ने सुबह ठीक 7 बजे न्यूरो वार्ड का उन्हें दौरा करवाया और पांच अचीवमेंट नोट करने  लायक थी । 
1.  वार्ड की सफाई सुबह 7 बजे से पहले हो जाती है।
2.  दूसरा कि मरीज और उनके रिश्तेदारों के जूतेचप्पल   वार्ड के बाहर ही उतारे जाते हैं। इसके साथ ही मरीजों  को पहनने के लिए वार्ड से ही चप्पल दी जाती है।
3.  मरीज के साथ केवल एक ही रिश्तेदार रह सकता है।
4.  चौथी मरीज और आवश्यक होने पर उसके परिजन       के  लिए दोनों समय का खाना और नाश्ता भी    
    उपलब्ध  कराया जाता है। 
5.  वार्ड में साउंड सिस्टम लगा दिया गया है। सुबह-         सुबह भजन और फिर दिन में कुछ मनोरंजन के लिए     गीत चलाएं जाते हैं। 
 
अनूमन आम धारणा रही है कि अजमेर और सरकारी  अस्पताल का नाम आते ही मरीज जे एल एन में भर्ती होने की अपेक्षा जयपुर रेफर करवाना पसंद करता है । न्यूरो सर्जरी में हमेशा गंभीर अवस्था में ही मरीज भर्ती होते हैं  । 
समाज सेवा में जुड़े रहने की वजह से मेरे पास भी ऐसे कई मरीज आए हैं और आते हैं और मुझे खुशी है कि जितने भी मेरे मिलने वालों के मरीज भर्ती हुए इक्का-दुक्का छोड़कर आज सभी स्वस्थ हैं ।  डॉ दत्ता का नाम आते ही मुझे मरीजों और उनके अभिभावकों की हौसला अफजाई करने में बिल्कुल भी देर नहीं लगती  थी कि न्यूरो सर्जरी में बाहर जाने की कतई आवश्यकता नहीं है । उन्होंने अपने जीवन में मस्तिष्क के कई जटिल ऑपरेशन करके सैंकडों लोगों की जिंदगीयां बचाई है । डॉ बीएस दत्ता के लिए कोई समय निश्चित नहीं था । आधी रात हो या सुबह तड़के । गंभीर मरीज को जिस समय जरूरत पड़ी डॉ दत्ता उपलब्ध रहे । एक सख्त चेहरे के पीछे मानवीय ह्रदय धड़कता था । 

आज उन सब के डॉ दत्ता की मृत्यु का समाचार मिलने पर फोन आए और मुझे यह श्रद्धांजलि लेख लिखने का अवसर दिया । 

आत्मविश्वास की जीती मिसाल रहे हैं डॉ  दत्ता और न्यूरों सर्जरी में उनका वरदहस्त रहा है । उनकी मृत्यु से चिकित्सा जगत में विशेषकर अजमेर जे एल एन  अस्पताल में उनके कार्यों और बातों को हमेशा याद रखा जाएगा और माननीय चिकित्सा मंत्री के लिए अब दुविधा भी रहेगी कि जयपुर में 14 न्यूरोसर्जन में से किसको अजमेर  भेजते हैं और क्या आने वाला न्यूरो सर्जन  डॉ दत्ता जैसी ऊंचाइयां छू पाएंगे ।

डॉ दत्ता के लिए मुझे परवीन शाकिर का शेर याद आ रहा है

एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा

शत शत नमन और सादर प्रणाम ।। 
सब गमगीन थे उन की मौत पर 
मगर तालियां बजाना भी नहीं भूले 
उनकी उपलब्धियों पर

डॉ लाल थदानी 
वरिष्ठ जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ,  
उप अधीक्षक,
जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल, अजमेर ।
8005529714


Saturday, February 6, 2021

शब्द / डॉ लाल थदानी

#drlalthadani
#psmcadre #publichealthmatters #publichealthprofessionalsforum
#MedicoFriendsSandeshSociety

Thursday, January 28, 2021

मैं, मेरा बेटा और मेरे पिता / डॉ लाल थदानी


मैं,  मेरा बेटा और  मेरे पिता    
तीन पीढ़ियां, तीन अनुभव, तीन परंपराएं
किस में ज्यादा, किस से कम, गुण कैसे बताएं
सात पीढ़ियों तक याद आएंगे सबको मेरे पिता

कैसे कह दूं मैंने पिता से बढ़कर संस्कार दिया  
कैसे मान लूं  मैंने पिता के बराबर प्यार दिया 
अद्भुत व्यक्तित्व के धनी, मधुमास हैं मेरे पिता
मेरी आस , मेरी सांस, मेरा विश्वास हैं मेरे पिता

क्या मैं मेरे पिता की तरह  मजबूत पूरा संसार हूं
क्या मैं अडिग वटवृक्ष , मेहनती , समझदार हूं
मैंने मेरे पिता से अच्छे बुरे की क्या कभी सलाह मानी
मैंने मेरे पुत्र के साथ बैठकर क्या कभी कोई चर्चा की

मेरे पिता ने मेरी बीमार मां की शिद्धत से बरसों सेवा की
आज जरा सा दुःख मुझे मायूस- विचलित कर जाता है
अक्सर सोचता हूं किस हाड़ मांस के बने थे मेरे पिता
टूट गया बंधन पर भूल ना पाया बिछड़न, जिन्दा हैं पिता

वो स्पर्श, आदर्शवाद, भीड़ में अलग पहचान थे मेरे पिता
परिवार को बांधने में सिद्धहस्त सबकी जान थे मेरे पिता
सभ्य सौम्य, सत्संग, सदाचार की प्रतिमूर्ति थे मेरे पिता आचार , सदभाव-व्यवहार की आपूर्ति थे मेरे पिता

मेरा स्वाभिमान है मेरा गौरव मेरे पिता
मेरा अभिमान है मेरा बेटा जो कल होगा पिता
अब मेरी पहचान है मेरा बेटा मेरे पिता
बस मैं, मेरा बेटा और  मेरे पिता    

डॉ लाल थदानी, अजमेर ।
#अल्फ़ाज़_दिलसे
28.1.2021




Tuesday, January 26, 2021

72 वाँ गणतंत्र दिवस समारोह / डॉ लाल थदानी

देश 72वां रिपब्लिक डे मना रहा है। राजपथ पर रिपब्लिक डे परेड हुई। इसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। दो बातें खास रहीं। पहली- बांग्लादेश की टुकड़ी ने पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लिया। दूसरी- भारतीय वायुसेना का राफेल फाइटर जेट भी पहली बार इस परेड का हिस्सा बना। हालांकि, कोरोना के चलते इस बार परेड की सूरत बदली-बदली नजर आई। 55 साल में पहली बार ऐसा हुआ जब रिपब्लिक डे परेड में कोई चीफ गेस्ट शामिल नहीं हुआ। इससे पहले भारत में 1952, 1953 और 1966 में भी गणतंत्र दिवस परेड में कोई चीफ गेस्ट शामिल नहीं हुआ था।

झलकियां

भारतीय वायुसेना का दम: रिपब्लिक डे परेड में वायसेना ने त्रिनेत्र फॉर्मेशन बनाया। इसे त्रिशूल फॉर्मेशन भी कहा जाता है। इसमें एक राफेल जेट फाइटर भी शामिल हुआ। राफेल की पहली खेप पिछले साल ही इंडियन एयरफोर्स को मिली है।

डॉ लाल थदानी

Sunday, January 17, 2021

शहर के वाशिंदों ने निगल लिये गांव / डॉ लाल थदानी

शहर के वाशिंदों ने निगल लिये गांव

हरी भरी वसुंधरा नीला आसमां 
उबड़ खाबड़ पगडंडी खेत  खलिहान
बैलों के घुंगरुओं की झनकार पर
गुनगुनाते हल चलाते किसान 
लोक गीतों पर थिरके छोरी के पांव
नाचते गाते मोर , चहचहाते पंछी, 
सांझ वेला लौटे अपनी ठांव
शहर के वाशिंदों ने निगल लिये गांव ।

रंग बिरंगे घर, रंगोली और द्वार
सावन की बदली घनघोर फुआर
सरलता, निश्छलता ,अपनापन, प्यार
कबड्डी, सतोलिया  के लिए मान मनुआर 
बच्चों की अठखेलियां कभी इनकार
बड़ों की डांट डपट , लाड़ दुलार
गीली मिट्टी पर फिसलते नंगे पांव 
शहर के वाशिंदों ने निगल लिये गांव ।

सुबह सिंदूरी, मुर्गे की बांग 
लस्सी, गुड़ ,  लसन प्याज
बाजरे की रोटी का स्वाद
मंगल गीत , ढोलक की धाप
शादी ब्याह का होता आग़ाज़
रंग बिरंगे लिबास में पूरा गांव
चौसर , चिलम, चौपाल पर लगते दांव
शहर के वाशिंदों ने निगल लिये गांव ।

बढ़ती जनसंख्या से 
रोजगार की तलाश में
शहर की चकाचौंध में 
आधुनिकता,आपाधापी में 
औद्योगिकरण , अतिक्रमण, अंधी दौड़ में
भटक गया भोला ग्रामीण किसान  
छूटा सबका गांव, पीपल की ठंडी छांव
शहर के वाशिंदों ने निगल लिया गांव ।

डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे

बड़े ही हर्ष का विषय है कि मेरी 16वीं काव्य रचना अमर उजाला में प्रकाशित हुई है ।               
इस काव्य रचना के साथ-साथ पूर्व की रचनाएं विभिन्न साहित्य मंच पर भी प्रकाशित की गई हैं । 
कृपया अपने कमेंट के साथ शेयर करें।         

 16वीं.    शहर के वाशिंदों  ने निगल लिये गांव https://www.amarujala.com/kavya/mere-alfaz/drlal-thadani-shahar-ke-vashindon-ne-nigal-liye-gaaon

15वीं.     आओ मुकम्मल करें ख़्वाब https://www.amarujala.com/kavya/mere-alfaz/drlal-thadani-aao-mukammal-karein-khwaab                                     


डॉ लाल थदानी
#अल्फ़ाज़_दिलसे



Friday, January 15, 2021

Melodious Musical Heart OP Nayyar / Dr Lal Thadani

Today 16 Jan 2021 is OP Nayyar's 
92nd #BirthAnniversary today. 
Did you know that during the 50s, 
All India Radio banned most of his songs because the broadcaster considered them too "trendy." He was called the Rhythm King and his evergreen compositions include: ‘Babuji Dheere Chalna,’ 
'Aankhon Hi Aankhon Mein Ishara Ho Gaya,’ 'Jaane Kahan Mera Jigar Gaya Jee' and many more. What makes you sway to his music even today?

Compiled and forwarded
Dr Lal Thadani
8005529714